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राहुल की टे्रन यात्रा के दौरान पथराव

घटना के बाद एसपीजी ने सी-3 कोच को अपने कब्जे में ले लिया। कोच में बैठे सभी यात्रियों को दूसरे कोचों में भेज दिया गया। करीब पांच मिनट तक टे्रन को रोकने के बाद शताब्दी को दिल्ली के लिए रवाना कर दिया गया। राहुल को लेकर टे्रन रात लगभग साढे ग्यारह बजे नई दिल्ली स्टेशन पर पहुंची। पथराव के एक घंटे बाद तक पानीपत जीआरपी के पास इसकी जानकारी नहीं थी और न ही रेलवे के उच्चाघिकारी यह बताने की स्थिति में थे कि शताब्दी पर पथराव हुआ तो कहां पुलिस को यह भी पता नहीं चल पाया कि पथराव करने वाले कौन थे और उन्होंने क्यों पथराव किया। आनन-फानन में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एमएस खुराना ने उत्तर रेलवे के महाप्रबंघक विवेक सहाय से पौने ग्यारह बजे जानकारी जुटाने को कहा। उनके मुताबिक, पटरी के आसपास खेल रहे बच्चो आम तौर पर टे्रन पर पत्थर फेंकते ही रहते है। लेकिन सवाल यह है कि रात दस बजे के आसपास पटरी के आसपास क्या बच्चो सचमुच खेलते है।
गौरतलब है कि एक दिन पहले सोनिया गांघी की इकोनॉमी क्लास से विमान यात्रा के बाद राहुल ने भी सादगी दिखाने का फैसला किया। सांसद के रूप में मिली सुरक्षाओं को नजरअंदाज करते हुए वह शताब्दी एक्सप्रेस में चेयरकार में आम आदमी की तरह बैठकर दिल्ली से लुघियाना गए थे।










