बोधगया। भारत की सभ्यता और संस्कृति ही नहीं आध्यात्मिक परम्पराएं भी सदियों से दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करती रही हंै, यही कारण है कि भारत को आध्यात्मिक गुरू भी माना जाता है। हिन्दुओं की आस्था के महान पर्व छठ ने फिर यह साबित कर दिखाया है।
भारत के प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में से एक गया जिले के बोधगया में जापान से आई एक पर्यटक मिने हा हा ने भी श्रद्धा व पूरे रीति-रिवाज के साथ छठ पर्व मनाया। जापानी पर्यटक 55 वर्षीय मिने हा हा ऎसे तो पिछले चार वर्षों से बोधगया आती रही हैं, परंतु इस बार वह खासतौर पर छठ पर्व के लिए ही यहां आई हैं। उन्होंने अन्य ग्रामीण महिलाओं के साथ शनिवार को उदीयमान सूर्य को अध्र्य दिया और छठ व्रत का पारण किया। इसके पूर्व गुरूवार को उन्होंने पूरी सादगी और पवित्रता के साथ "खरना" भी किया था। वह कहती हैं कि वह बोधगया में गरीबों के कल्याण के लिए एक ट्रस्ट चलाती हैं।
उन्होंने बताया कि चार वर्ष पूर्व वह पहली बार बिहार आई थीं और दो वर्ष पहले उन्होंने यहां के लोगों को छठ करते देखा था। इस दौरान उन्होंने यहां के लोगों से छठ की महिमा की जानकारी प्राप्त की थी। तभी से उनके मन में छठ करने की लालसा थी जो इस वर्ष पूरी हो गई। छठ करने के बाद संतुष्ट दिख रहीं मिने ने बताया कि उन्होंने यह छठ पर्व विश्व के, खासकर बच्चों के कल्याण एवं खुशहाली के लिए मनाया। वह कहती हैं कि छठ मईया उनकी मनोकामना जरूर पूरी करेंगी। उन्होंने कहा कि छठ पर्व की सादगी और पवित्रता ने उन्हें सबसे ज्यादा आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि वह अब प्रतिवर्ष नियमपूर्वक छठ व्रत करने की कोशिश करेंगी।
उन्होंने बताया कि वह तो छठ पर्व करने के लिए यहां आई हैं परंतु उनके साथ 20 सदस्यीय दल इस पर्व की विधि और नजदीक से देखने के कारण यहां आया है। इधर पटना के गंगा घाटों पर भी विदेशियों का एक दल छठ पर्व को देखने और समझने पहुंचा था। इस दल के लोगों ने भी सुबह और शाम घाट पर पहुंचकर ब़डी तन्मयता से छठ पर्व के विषय में जानकारी प्राप्त की।
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