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रिश्वत देने के मामले में भारतीय और चीनी कंपनियां आगे

रिपोर्ट का कहना है कि सर्वे में शामिल अंतर्राष्ट्रीय स्तर के आघे से ज्यादा बिजनेस अघिकारी यह मानते है कि भष्ट्राचार की वजह से किसी परियोजना की लागत 10 फीसदी ज्यादा हो जाती है। 1990 से 2005 तक 300 से ज्यादा बने अंतर्राष्ट्रीय कारोबारी समूहों द्वारा उपभोक्ताओं से तकरीबन 300 अरब डॉलर अघिक वसूला गया। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बीते दो सालों में भष्ट्राचार के मामलों में लिप्त होने के कारण कंपनियों को अरबों डॉलर बतौर अर्थ दंड चुकाना पडा है। रिपोर्ट कहती है कि भष्ट्राचार के कारण कर्मचारियों का मनोबल भी गिरता है और ग्राहकों के बीच विश्वास कम होता है। साथ ही संभावित पार्टनरों के बीच कंपनी की इमेज भी खराब होती है।










