कोई परिणाम नहीं मिला

No Result Found

भारत समाचार

रिश्वत देने के मामले में भारतीय और चीनी कंपनियां आगे

नई दिल्ली, 24 सितंबर। दुनिया भर में ढाई हजार से ज्यादा व्यवसायियों के साथ हुए सर्वेक्षण के अनुसार 30 प्रतिशत लोगों का मानना है कि भारतीय और चीनी कंपनियां विदेश में कारोबार करते वक्त सरकारी अघिकारियों को मोटी रिश्वत देने के मामले में दूसरों को काफी पीछे छोड देती है। इस रिपोर्ट को तैयार करते समय 26 देशों का अघ्ययन किया गया और हर देश में कम से कम 100 व्यवसायियों को सवाल पूछे गए। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया के मुताबिक इंटीग्रिटी पैक्ट एक तरीका है जिसके जरिए उन्हें सरकारी कंपनियों में, खासकर टेडरों और व्यापार प्राçप्त के सिलसिले में भष्ट्राचार को लेकर जानकारी पता चलती है। सरकारी कंपनियां तो इस इंटीग्रिटी पैक्ट अपनाने में दिलचस्पी दिखा रही है लेकिन निजी कंपनियों की अभी तक इसमें दिलचस्पी नही है। सर्वे के तहत जवाब देने वालों में से 30 फीसदी लोगों ने कहा कि भारतीय कंपनियां अपना कारोबार बढाने के लिए देश और विदेश में सरकारी अघिकारियों को रिश्वत देती है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनियां रिश्वत देते वक्त जो रकम खर्च करती है, उन्हें अंतत: वे उपभोक्ताओं के सिर डाल देती है।
रिपोर्ट का कहना है कि सर्वे में शामिल अंतर्राष्ट्रीय स्तर के आघे से ज्यादा बिजनेस अघिकारी यह मानते है कि भष्ट्राचार की वजह से किसी परियोजना की लागत 10 फीसदी ज्यादा हो जाती है। 1990 से 2005 तक 300 से ज्यादा बने अंतर्राष्ट्रीय कारोबारी समूहों द्वारा उपभोक्ताओं से तकरीबन 300 अरब डॉलर अघिक वसूला गया। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बीते दो सालों में भष्ट्राचार के मामलों में लिप्त होने के कारण कंपनियों को अरबों डॉलर बतौर अर्थ दंड चुकाना पडा है। रिपोर्ट कहती है कि भष्ट्राचार के कारण कर्मचारियों का मनोबल भी गिरता है और ग्राहकों के बीच विश्वास कम होता है। साथ ही संभावित पार्टनरों के बीच कंपनी की इमेज भी खराब होती है।

अन्य खबरें

अन्य खबरें

कोई परिणाम नहीं मिला