जिनेवा, 24 सितंबर। विश्व मौसम विज्ञान संगठन का अनुमान है कि सूर्य की पराबैंगनी किरणौं से रक्षा करने वाली ओजोन परत का छेद पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल अपेक्षाकृत छोटा हो गया है। संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था ने एक बयान जारी कर कहा कि मौसम संबंधी स्थितियों से संकेत मिलता है कि ओजोन का छेद इस साल 2006 से 2008 के मुकाबले छोटा होगा तथा 2007 में इसका जितना था, उसके आसपास ही रहने का अनुमान है। अंटार्कटिक क्षेत्र के ऊपर ओजोन की पर में छेद का पता सबसे पहले 1980 के दशक में लगा था। यह नियमित रूप से हर वर्ष अगस्त में बन जाता है तथा सितंबर के अंत या अक्टूबर की शुरूआत में इसका आकार सबसे बडा हो जाता है तथा दिसंबर में भर जाता है। इसका आकार मौसम स्थितियों पर निर्भर करता है। ओजोन के विशेषज्ञ गेर बाथेन ने कहा कि इस वर्ष यह छेद पहले के मुकाबले जल्दी बनना शुरू हो गया है। 16 सितंबर को यह दो करोड चालीस वर्ग किलोमीटर हो गया था जबकि वर्ष 2008 में इसका अधिकतम आकार दो करोड 70 लाख वर्ग किलोमीटर तथा वर्ष 2007 में दो करोड 50 लाख वर्ग किलोमीटर हो गया था। विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि यह छेद इतने खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है कि यह 2075 तक ही भर पाएगा। ओजोन की परत में छेद होन से धूप से त्वचा के झुलस जाने, त्वचा का कैंसर हो जाने तथा वनस्पतियों को नुकसान होने का खतरा होता है।