नई दिल्ली, 30 सितंबर। राजनीति में युवाओं को आगे लाने की बात भले ही सभी पार्टियां कर रही हों, मगर उनमें उनकी एंट्री बिल्कुल आसान नहीं है। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में छात्रों के बीच पहुंचे कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी का दर्द कुछ इस अंदाज उभर कर सामने आया। राहुल ने कहा कि युवाओं को लेकर देश के राजनीतिक दल लोकतांत्रिक नहीं हैं। कांग्रेस के युवराज के इस बयान ने नौजवानों का नारा बुलंद करने वाली राजनीतिक पार्टियों की अंदरूनी राजनीति की पोल खोलकर रख दी है। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी यह भली प्रकार जान गए हैं कि देश में राजनीति का मतलब एकदम बदल गया है। अगर राजनीति करने वाली पार्टियां लोकतांत्रिक नहीं होगी, तो फिर देश का हाल क्या होगा। यह चिंता राहुल गांधी की राजनीति का अहम हिस्सा है। राहुल ने बेबाकी से यह बात जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में रखी। मौका था यूथ पॉलिटिक्स और डवलपमेंट के मुद्दे पर एनएसयूआई और जेएनयू के छात्रों के साथ पब्लिक मीटिंग का। राहुल ने छात्रों को बेखौफ होकर सवाल पूछने को कहा और छात्रों ने भी हर मुद्दे पर उनकी राय जाननी चाही। अल्पसंख्यक आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सच्चार कमेटी की रिपोर्ट से सहमत है। राहुल की पब्लिक मीटिंग को लेकर जेएनयू के छात्रों में खासा उत्साह था। राहुल के जवाब से छात्रों में मिलीजुली प्रतिक्रिया रही। कइयों ने माना कि राहुल कई सवालों से परेशान हुए इसलिए उसका जवाब भी संतोषजनक नहीं लगा।