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भारत समाचार

अब छोटे पर्दे को भाई गांव की गोरियां

नई दिल्ली। छोटे पर्दे पर अब सजी-धजी सास बहुओं के दिन लद गए हैं और इनकी जगह ले ली हैं गांव में रहने वाली सीधी-साधी गोरियों और उनके परिवार की समस्याओं ने। छोटे पर्दे पर पिछले कुछ समय से गांवों की पृष्ठभूमि पर बनने वाले धारावाहिकों की बाढ सी आ गई हैं।
कलर्स, एनडीटीवी इमेजिन और कई अन्य चैनलों पर प्रसारित होने वाले ऎसे धारावाहिकों ने स्टार प्लस, सोनी और जी टीवी को भी मजबूर कर दिया हैं कि वे ग्रामीण लोगों की दुर्दशा की ओर अपना ध्यान केंद्रित कर लें। एनडीटीवी इमेजिन के उपाध्यक्ष निखिल मढोक ने कहा कि लगभग एक दशक पूर्व छोटे पर्दे पर ग्रामीण भारत का चित्रण बहुत कम था। इसे प्रयोग के तौर पर बहुत अच्छा नहीं माना जाता था, लेकिन सैटेलाइट चैनलों के छोटे कस्बों और गांवों में पहुंच बढाने के बाद स्थितियां बदल गई हैं। मढोक ने कहा, शहरी इलाकों में अब संतृप्तता आ गई हैं, इसलिए भारत के गांव चैनलों का मुख्य केंद्र बन गए हैं।
नई परंपरा का स्वागत करते हुए टीवी की नियमित दर्शक पूनम जैन ने कहा, दर्शकों की पसंद बदल गई हैं। अब वे शहरी इलाकों के परिवारों को टीवी पर नहीं देखना चाहते। कई चैनलों ने दर्शकों की इस नब्ज को पकड लिया है और अचानक ही गांव धारावाहिकों का केंद्र बन गए हैं। पूनम ने कहा, यह धारावाहिक वास्तविक भारत दिखा रहे हैं। इनकी संस्कृति और वास्तविकता शहरी भारत के लिए बिल्कुल नई हैं।

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