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भारत समाचार

कैगा परमाणु संयंत्र में तो़डफो़ड की साजिश !

कैगा। भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम (एनपीसीआईएल) ने कर्नाटक के उत्तर कन्ऩ्ाड जिले में स्थित अपने कैगा परमाणु संयंत्र के एक वाटर कूलर में रेडियोधर्मी तरल पदार्थ ट्राइटियम मिलाए जाने से वहां काम करने वाले कुछ मजदूरों के रेडियों धर्मी विकिरण से प्रभावित होने की घटना में तो़डफो़ड की साजिश होने का अंदेशा जताया है। परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोदकर ने रविवार को कहा कि किसी ने जानबूझकर कैगा परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पेयजल वाटर कूलर मं रेडियोधर्मी ट्राइटियम रखा। इस वजह से करीब 50 फीसदी कर्मचारी रेडिएशन के बढ़े हुए स्तर के संपर्क में आए। उन्होंने कहा कि जांच के बाद इसमें शामिल पाए गए लोगों को परमाणु ऊर्जा एवं अन्य कानूनों के तहत दंडित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि गलत हरकत के पीछे कौन है।
सूत्रों के मुताबिक कैगा संयंत्र की प्रथम देखभाल इकाई में काम कर रहे करीब 45 से 50 कर्मचारियें का उपचार किया गया। इन लोगों ने 24 नवंबर को यहां एक वाटर कूलर से पानी पिया था। ट्राइटियम हाइड्रोजन का रेडियोधर्मी समस्थानिक होता है और इसका इस्तेमाल अनुसंधान संलयन संयंत्रों और न्यूट्रान जनरेटर में किया जाता है। संयंत्र के केंद्र निदेशक जेपी गुप्ता के अनुसार जांचकर्ताओं को पता चला कि एक वाटरकूलर में प्रदूषित जल है और यहां काम कर रहे लोगों के शरीर के नमूनों का विश्£ेषण किया गया और कुछ को मेडिकल परामर्श के लिए भेजा गया।
उन्होने कहा कि सभी लोग अभी अपनी सामान्य सेवा पर हैं। वहीं, काकोदकर ने कहा कि मामले की दो कोणों से जांच की जा रही है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य बी भट्टाचार्य के अनुसार कूलर सील्ड था और इसे सील्ड पाया गया लेकिन बाद में जांचकर्ताओं ने पाया कि किसी शरारती तत्व ने कूलर की ओवरफ्लो लाइन के रास्ते ट्राइटिएटिड पानी डाला और पूरे कूलर को प्रदूषित कर दिया। लोगों ने इस पानी को पिया। हलांकि सबकुछ सामान्य है। कोई गंभीर बात नहीं है। काकोदकर ने कहा कि नियामक सीमाएं काफी क़डी हैं इसलिए किसी नुकसान की संभावना नहीं है।

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