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दुबई संकट विदेशी बैकों के लिए नुकसान का सबब बन सकता है

एचडीएफसी के अनुसार गत बुधवार को दुबई वल्र्ड ने जिस ऋण संकट का खुलासा किया था कि दरअसल काफी पहले ही मौजूद था। बैक ने कहा कि दुबई वल्र्ड ने मई 2010 तक 60 अरब डॉलर के जिस कर्ज को चुकाने की मोहलत मांगी है वह कर्ज कई दिनों से उस पर चढ़ रहा था और यह कोई एक दिन की बात नहीं है। बैंक के अनुसार अचल संपत्ति उद्योग के लिए विश्व विख्यात दुबई में भूमि-भवन की कीमते वर्ष 2008 में अपने रिकार्ड स्तर से फिसलते हुए 60 प्रतिशत गिर चुकी है जिसके कारण यहां आधारभू्रत ढांचा क्षेत्र की कई बडी दिग्गज कंपनियां भुगतान संकट में फंस चुकी है।
दुबई के बदलते परिदृश्य की वजह से "स्टैडर्ड एंड पुअर्स" और "मूडी" जैसी साख निर्धारक संस्थाओं ने दुबई के कई बैकों और सरकारी वित्तीय संस्थाओं को नकारात्मक दायरे (नेगेटिव रेज) में डाल दिया है। एचडीएफसी का कहना है कि दुबई और भारत के बीच अरसे से बने व्यापारिक संबंधों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था के बैक, निर्यात, प्रत्यावर्तन, निर्माण और अचल संपत्ति क्षेत्रों में दुबई ऋण संकट का असर दिख सकता है।




















