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भारत समाचार

गुजरात में मतदान अनिवार्य

गांधीनगर। गुजरात में अब स्थानीय निकाय यानी नगर निगम, पालिकाओं और पंचायत चुनाव में वोट डालना सभी के लिए अनिवार्य कर दिया गया हैं। देश भर में इस तरह का कानून पहली बार पारित हुआ हैं। विधानसभा ने शनिवार को गुजरात स्थानीय निकाय :संशोधन: विधेयक को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही स्थानीय निकाय चुनाव में महिला आरक्षण को 33 से बढ़ाकर 50 फीसदी किए जाने का प्रस्ताव भी मंजूर हो गया।
कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्ष ने मतदान को अनिवार्य बनाए जाने संबंधी कानून को पुरजोर विरोध किया। कांग्रेस का कहना था कि यह संविधान के प्रावधानों के लिए विरोधाभास है। हालांकि कांग्रेस ने महिला आरक्षण की सीमा 33 फीसदी से बढाकर 50 फीसदी किए जाने के प्रस्ताव का समर्थन किया। कांग्रेस ने अनिवार्य मतदान और महिला आरक्षण के लिए अलग-अलग विधेयक लाए जाने की मांग की।
गुजरात स्थानीय निकाय :संशोधन: विधेयक में कहा गया है कि अगर मतदाता बिना उपयुक्त कारण :नियमों के मुताबिक: के अपना वोट नहीं डालता है तो उसे डिफाल्टर घोषित किया जाएगा। यहीं नहीं, उसके खिलाफ तय प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई पर अनुमोदन के लिए उसे विधानसभा के समक्ष पेश भी किया जाएगा। विधेयक का उद्देश्य और वजह बताने के लिए जारी वक्तव्य में कहा गया है कि वोटरों में मतदान के प्रति हो रही अरूचि के मद्देनजर वोटिंग को कानूनन अनिवार्य बनाया गया हैं।

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