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पहली गलती माफ : दूसरी पर टाटा

गडकरी ने अध्यक्ष बनने के बाद अपनी संवाददाता सम्मेलन में अपनी भावी कार्यशैली की झलक दिखाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि वह भलीभांति जानते है कि उन्हें अनेक वरिष्ठ नेताओं के बीच नये दायित्व का निर्वहन करना है। दरअसल वह वरिष्ठ नेताओं के मागदर्शन से अगले तीन साल में पार्टी को संगठनात्मक दृष्टि से मजबूत करेंगे। वह इस दौरान सांसद भी नहीं बनेंगे। अपनी भावी टीम के बारे में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में उन्होंने कहा कि वह शीष प्रदेश अध्यक्षों, विभिन्न नेताओं से पार्टी के लिए कार्य करने वाले अच्छे, सक्रिय गतिशील कार्यकाताओं की सूची मांगेंगे फिर उनकी रूचि के अनुसार काम सौंपा जाएगा। उन्हें अपना काम करने की पूरी आजादी होगी और गलती भी होगी तो अध्यक्ष के नाते वह इसमें सुधार करने का मौका भी देंगे कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा और अपनी गलती को सुधारने का एक मौका मिलेगा और जो भी दोबारा गलती करेगा, पार्टी उसे नमस्कार करते हुए कार्यमुक्त करने में भी संकोच नहीं करेंगी।
राम मंदिर धारा 370 और समान नागरिक संहिता जैसे भाजपा के घोषित एजेंडे के बारे में प्रश्न पूछे जाने पर गडकरी ने कहा कि पार्टी के जो पूर्व निर्धारित एजेंडे है उनमें किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। इतना कहकर उन्होंने इन प्रश्नों पर फिर कभी चर्चा करने की बात कहकर टाल दिया। उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में अपने बयान और फिर पूछे गए कई प्रश्नों के उत्तर में गरीबों की भलाई और बेरोजगारी दूरी करने के उपाय बिना सरकारी सहायता के ही करने के संकल्प लिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।










