नई दिल्ली। देश में तीसरी पीढ़ी (3जी) की मोबाइल सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित करने की 143 चरण की एक बोली शनिवार को सम्पन्न हो गई। इससे सरकार को 51,833.46 करो़ड रूपए (11.4 अरब डॉलर) का तात्कालिक राजस्व प्राप्त हुआ।
यह राशि उम्मीद से काफी अधिक है। सरकार को उम्मीद थी कि 3जी नीलामी और देश में ब्रॉडबैंड वायरलेस इंटरनेट सेवाओं के शुरू होने से उसे करीब 55,000 करो़ड रूपए (12 अरब डॉलर) प्राप्त होंगे लेकिन कुछ क्षेत्रों में आक्रामक बोली से सरकार केवल 3जी की नीलामी से ही अनुमानित राशि से ज्यादा रकम हासिल करने की ओर अग्रसर है। 3जी के लिए नौ अप्रैल को बोली लगनी शुरू हुई थी। नीलामी के 25 दिन के अंत तक एक पैन-इंडिया 3जी लाइसेंस के लिए तात्कालिक विजेता कीमत 12,850.66 करो़ड रूपए रही। यह आरक्षित कीमत 3,500 करो़ड रूपए से 267 फीसदी ज्यादा है। भारती एयरटेल, रिलायंस कम्युनिकेशंस, वोडाफोन एस्सार, आइडिया सेल्युलर, टाटा टेलीसर्विसेस, एयरसेल, एटीसलाट, एस टेल और वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस जैसी दूरसंचार से जु़डी नौ कंपनियों ने ऑनलाइन नीलामी में हिस्सा लिया। सरकार ने भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) को पहले ही 3जी सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम दिया हुआ है। इसके लिए यह शर्त है कि नीलामी के बाद निजी कंपनियों पर लगाए गए लाइसेंस शुल्क के बराबर ही इन दोनों कंपनियों को भी शुल्क अदा करना होगा।











