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भारत समाचार

दादा, पिता से वैचारिक असहमति का सवाल नहीं : आदित्य ठाकरे

मुम्बई। महाराष्ट्र की राजनीति में कदम रख चुके ठाकरे परिवार की तीसरी पीढ़ी के वारिस आदित्य ठाकरे ने कहा है कि दादा बाल ठाकरे और पिता उद्धव ठाकरे के साथ किसी भी तरह के वैचारिक असहमति का सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने चाचा राज ठाकरे को लेकर कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। बाल ठाकरे ने रविवार को मुम्बई के शिवाजी पार्क में आयोजित जनसभा में आदित्य का औपचारिक रूप से "राजनीतिक अभिषेक" किया। आदित्य 20 साल के हैं और सेंट जेवियर्स कॉलेज के छात्र हैं। उनका कहना है कि शिवसेना प्रमुख और दादा बाल ठाकरे आधुनिक भारत के उनके सबसे ब़डे आदर्श हैं।
आदित्य ने कहा, ""मेरी अपने दादा और पिता से कोई वैचारिक असहमति नहीं है। मुख्य मुद्दे पहले की तरह ही रहेंगे। यह हो सकता है कि इस पीढ़ी के लिए प्राथमिकताएं बदल जाएं।"" उन्होंने कहा, ""मेरे दादा और पिता ने देश और महाराष्ट्र के लोगों के खिलाफ हुए अन्याय को लेकर लंबा संघर्ष किया है। मेरी प्राथमिकताएं युवा और उनसे जु़डे मुद्दे हैं।"" शिवसेना से अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का गठन करने वाले राज ठाकरे के बारे में पूछे जाने पर आदित्य ने कहा, ""इस पर कोई टिप्पणी नहीं।"" रोहिंटन मिस्त्री की पुस्तक "सच ए लांग जर्नी" के बारे में उन्होंने कहा कि इस किताब के बाजारों में बिकने पर ऎतराज नहीं है लेकिन इसे मुम्बई विश्वविद्यालय की पाठयक्रम में जगह नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा, ""इस पुस्तक के बाजार में उपलब्ध रहने पर कोई ऎतराज नहीं है। परंतु हम पर थोपी जा रही। हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते।"" शिवसेना की छात्र शाखा के विरोध के बाद मिस्त्री की इस पुस्तक मुम्बई विश्वविद्यालय के पाठयक्रम से हटा लिया गया था।
आदित्य ने कहा, ""नीति की आलोचना उचित है और हमें स्वीकार भी है। परंतु ऎसी पुस्तक हमारे पाठयक्रम का हिस्सा बन जाए, जिसे पचा पाना हमारे लिए असंभव है।"" उन्होंने कहा, ""इस पुस्तक में मुम्बई की कई चीजों के बारे में गलत भाषा का इस्तेमाल किया गया है। हम इसे पाठयक्रम में शामिल करने के हम खिलाफ हंै। आश्चर्य की बात है कि यह बीते तीन वर्षो से विश्वविद्यालय के पाठयक्रम का हिस्सा थी।""  

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