नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के छद्म युद्ध जारी रखने और क्षेत्र में चीन की दखलंदाजी बढ़ने की रक्षा मंत्री एक एंटनी ने स्वीकारी है। उन्होंने दोनों देशों की इस कार्रवाई के प्रति सचेत करते हुए सशस्त्र बलों से निगरानी में कोई कोताही नहीं बरतने को कहा है। संयुक्त कमांडरों के दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए एंटनी ने कहा कि इस संबंध में कई खतरे हैं।
उन्होंने कहा, हमारी भौगोलिक स्थिति और ऎतिहासिक बाध्यता से उत्पन्न चुनौतियां किसी भी देश के लिए अनोखी स्थिति है।थ इन चुनौतीपूर्ण स्थितियों में सबसे अग्रणी हमारे प़डोसी देशों की ओर से आ रही है, जो पहले भी और अभी भी हमारी राष्ट्रीय सम्प्रभुता के समक्ष खतरा पैदा करने को तत्पर हैं। इस संबंध में कई तरह के खतरे हमारे समक्ष चुनौतियां उत्पन्न करते हैं। हाल के महीनों की घटनाओं से संकेत मिलता है कि जम्मू-कश्मीर में छद्म युद्ध निर्बाध रूप से जारी है। इस संबंध में जरूरी निरोधात्मक उपाय किए गए हैं ताकि मुंबई पर 26/11 हमलों जैसी घटनाएं न हो। खुफिया जानकारी इस बात पर बल देती है कि हम निगरानी में किसी तरह की कोताही नहीं झेल सकते हैं। भारत की ओर से चीन के साथ दोस्ताना संबंध बनाने की चाहत का जिक्र करते हुए एंटनी ने हालांकि कहा कि देश सीमा पर चीन के सैन्य जमाव़डे और भौतिक आधारभूत संरचना के विकास पर आंख नहीं मूंद सकता है। उन्होंन सचेत किया कि क्षेत्र के दो ब़डे राष्ट्रों की शांति स्थापित करने और विकास का मार्ग प्रशस्त करने में समान जवाबदेही है जिससे व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाते हुए अधिक से अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। रक्षा मंत्री ने कहा, हम चीन के साथ मित्रवत संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। हम चीन के सैन्य जमाव़डे को नजरंदाज नहीं कर सकते हैं। वास्तव में चीन की ओर से क्षेत्र में दखलंदाजी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है, लेकिन इसे किसी खास देश से जो़डकर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पूर्व और नक्सलवाद पर सरकार की ओर से सतत ध्यान दिया जाना महत्वपूर्ण है।
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एंटनी ने माना, क्षेत्र में बढ़ रही है चीन की दखलंदाजी





















