नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से एक बार फिर कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज को हटाने की मांग की।
पार्टी ने कहा कि राज्यपालों की नियुक्ति के सम्बंध में सरकारिया आयोग द्वारा की गई सिफारिशों पर व्यापक बहस होनी चाहिए और उसमें मौजूद खामियों के मद्देनजर सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए। भाजपा के वरिष्ठ नेता एम. वेंकैया नायडू ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा, ""विधानसभा अध्यक्ष के. जी. बोपैया द्वारा अयोग्य करार दिए गए भाजपा विधायकों से सम्बंधित फैसले को कर्नाटक उच्चा न्यायालय द्वारा उचित ठहराए जाने के बाद ही राज्यपाल को इस्तीफा दे देना चाहिए था लेकिन उन्होंने ऎसा नहीं किया।""
उन्होंने कहा, ""इससे राज्यपाल की विश्वसनीयता खतरे में प़डी है और राज्यपाल जैसी संस्था को नुकसान पहुंचा है। ऎसे में उनका इस पद पर बने रहने से राज भवन की गरिमा और धूमिल होगी।"" नायडू ने कहा, ""वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भेंट कर भारद्वाज को हटाए जाने की मांग की थी तब उन्होंने आश्वासन दिया था कि केंद्र सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है और वह इस मामले को देखेंगे। लेकिन दुर्भाग्यवश राज्यपाल को हटाए जाने के सम्बंध में कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए केंद्र की भूमिका को लेकर अभी भी संदेह बना हुआ है।""
उन्होंने कहा कि इसलिए एक बार फिर प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार से मांग करती है कि राज्यपाल को वापस बुलाए जाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। उल्लेखनीय है कि भारद्वाज ने एक पत्र के माध्यम से बोपैया को 224 सदस्यीय विधानसभा में छह दिसम्बर को यथास्थिति को बरकरार रखने का निर्देश दिया था। मतलब राज्यपाल ने बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा सरकार द्वारा बहुमत साबित करने के बावजूद उन्हें दोबारा बहुमत साबित करने को कहा था।
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भाजपा ने फिर की भारद्वाज को हटाने की मांग











