नोएडा। भारत में क्रिकेट को "धर्म" का दर्जा प्राप्त है और सचिन तेंदुलकर को इस धर्म के तहत "क्रिकेट का भगवान" कहा जाता है लेकिन खुद तेंदुलकर इससे इत्तेफाक नहीं रखते। तेंदुलकर के मुताबिक वह "भगवान" नहीं बल्कि एक साधारण इंसान हैं, जो परमेश्वर की मेहरबानी से देश की सेवा में जुटे हैं।
दिल्ली के करीब उत्तर प्रदेश के नोएडा में कैनन इंडिया के खुदरा स्टोर के उद्घाटन मौके पर तेंदुलकर से जब यह पूछा गया कि "क्रिकेट का भगवान" क्या 2011 में भारत को विश्व कप जिता पाएगा, तब उन्होंने इसका जवाब मुस्कुराकर दिया और कहा कि वह भगवान नहीं बल्कि एक साधारण इंसान हैं, जो भगवान की अनुकम्पा की बदौलत क्रिकेट की सेवा में जुटे हैं। तेंदुलकर ने कहा, ""मैं भगवान नहीं। मैं आपकी तरह एक साधारण इंसान हू। उस भगवान से मेरी तुलना जायज नहीं, जिसकी बदौलत दुनिया चलती है और साथ ही मैं भी चलता हू। मेरा काम खेलना है और यह भी मैं भगवान के आशीर्वाद की बदौलत ही कर रहा हू। मैं भगवान को इस बात के लिए धन्यवाद देता हू कि उसने मुझे इस काबिल बनाया कि मैं बीते 21 वर्षो से देशवासियों की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए खेल रहा हू।""
उन्होंने कहा कि बचपन से ही उनको क्रिकेट से लगाव था। उनका सपना था कि वह देश के लिए खेलें। उनके शब्दों में "वह सपना पूरा हुआ और इसके लिए मैं भगवान को धन्यवाद देता हूं।"
तेंदुलकर ने कहा, ""जहां तक 2011 के विश्व कप में टीम की जीत का सवाल है तो मेरे साथ-साथ टीम का हर सदस्य अपनी क्षमता के साथ न्याय करने का प्रयास करेगा। हम अच्छा खेलेंगे तो जीत जरूर मिलेगी। विश्व कप से पहले हमें कई श्रृंखलाएं खेलनी है और इनके माध्यम से हमें अभ्यास का अच्छा मौका मिलेगा। इन मौकों का उपयोग करते हुए हम विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन करने का प्रयास करेंगे। एक खिल़ाडी के तौर पर मैं इतना ही कर सकता हू। खिताब एक मुकाम है और हमारा प्रयास उस मुकाम तक पहुंचने का होगा। आगे भगवान की मर्जी।""
भारत समाचार
भगवान नहीं हूं मैं : तेंदुलकर











