नई दिल्ली। सरकार ने यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्रॉडक्ट्स (यूलिप) पर अधिकार को लेकर बाजार नियामक सेबी और बीमा नियामक इरडा के बीच विवाद को समाप्त कर दिया है। सरकार ने एक अध्यादेश जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि यूलिप बीमा उत्पाद है और इनका नियमन इरडा के अधिकार क्षेत्र में होगा।
सरकार ने कानून में जरूरी बदलाव के लिए अध्यादेश जारी करने के बाद जारी एक वक्तव्य में कहा कि जीवन बीमा व्यवसाय में हर तरह के यूलिप और इस तरह के सभी उत्पाद शामिल होंगे। इससे यूलिप पर अधिकार को लेकर दो वित्तीय नियामकों के बीच विवाद के सभी मुद्दे समाप्त हो जाएंगे। सरकार ने यह भी कहा कि है कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता वाली एक उच्चस्तरीय समिति इस तरह के मिश्रित उत्पादों से जुडे अधिकार क्षेत्र के मुद्दों को निपटाएगी। सेबी ने अप्रैल में उस समय सभी को चौका दिया था जब उसने जीवन बीमा क्षेत्र की 14 कंपनियों को नए यूलिप जारी करने से रोक दिया था। हालांकि तभी बीमा क्षेत्र के नियामक इरडा ने बीमा कंपनियों को सेबी के आदेश को नहीं मानने के लिए कह दिया। इसके बाद मामला वित्त मंत्रालय पहुंचा। मंत्रालय ने दोनों को मामला सुलझाने के लिए न्यायालय जाने की सलाह दी लेकिन साथ ही मामले में स्थिति ज्यों की त्यों बनाए रखने के लिए कहा। निजी क्षेत्र की जीवन बीमा कंपनियों के कुल कारोबार में यूलिप योजनाओं का 50 प्रतिशत से अधिक कारोबार है। यूलिप योजनाओं के जरिए जुटाए जाने वाली राशि का ब़डा हिस्सा शेयर बाजार में निवेश किया जाता है।











