नई दिल्ली। अयोध्या के बहुचर्चित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ का फैसला टालने संबंधी याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट इस मामले में पिछले हफ्ते 24 सितंबर को ही फैसला सुनाने वाला था, लेकिन इससे ठीक एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने फैसले पर हफ्ते भर की रोक लगा दी।
सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अखिल भारत हिंदू महासभा ने सोमवार को कहा, इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा फैसले में और देर नहीं होनी चाहिए। दोनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग हलफनामों में अपना मत रखा। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने लखनऊ में कहा, एक हलफनामा दाखिल कर दिया गया है जिसमें फैसला एक अक्टूबर तक करने की मांग की गई है क्योंकि इसी दिन पीठ के एक जज रिटायर हो रहे है। उन्होंने कहा, बातचीत से मामला नहीं सुलझ सकता, क्योंकि अब तक इससे कोई नतीजा नहीं निकला है।
दूसरी ओर इस मुकदमे में मुख्य पक्षकार निर्मोही अखाडा ने कहा, वह मामले को बातचीत से निपटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से फैसला तीन महीने टालने का अनुरोध करेगा। अखाडे के अधिवा रंजीत लाल वर्मा ने कहा, 30 सितंबर को सेवानिवृत हो रहे न्यायमूर्ति डीवी शर्मा का कार्यकाल तीन महीने के लिए बढा दिया जाना चाहिए। इस बीच आपसी बातचीत से मामले का समाधान नहीं होता, तो अदालत अपना फैसला सुना दे। वहीं हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश तिवारी ने कहा, हमने फैसला टाले जाने के लिए दाखिल याचिका के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है।
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अयोध्या के फैसले पर आज होगी सुनवाई











