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भारत समाचार

बुंदेलखंड में उ़डद और तिल की फसल चौपट

भोपाल। समस्याएं बुंदेलखंड का पीछा छो़डने का नाम नहीं ले रही हैं। सूखे की मार से उबर रहे इस इलाके में अब खराब बीजों के कारण उ़डद और तिल की लगभग 50 करो़ड रूपये की फसल बर्बाद हो गई है। हजारों हेक्टयर क्षेत्र में फसल तो लहलहा रही है मगर उनमें फल और फूल का नामोनिशान तक नहीं है। बुंदेलखंड के पांच जिले छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह, पन्ना और सागर उ़डद और तिल के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हंै, मगर यहां इस बार फसल पूरी तरह बर्बाद होने के आसार बन गए हंै। उ़डद की 7,043 हेक्टेयर और तिल की 2,179 हेक्टेयर जमीन में बोई गई फसल पूरी तरह चौपट होने के कगार पर है। फसल का विकास तो भरपूर हुआ है लेकिन इसमें फूल नहीं पनपा है। फसल की अच्छी पैदावार न होने की शिकायतों पर किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने हालात का जायजा लेने के लिए संबंधित इलाकों में जांच दल भेजा तो पता चला कि सात हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उ़डद की फसल तो ख़डी है मगर उसमें फल आए ही नहीं हैं। यही हाल तिल का है। दो हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र ऎसा है जहां तिल की फसल फलविहीन है। दोनों फसलों के संदर्भ मे कृषि विशेषज्ञों की जो जांच रिपोर्ट आई है, उससे पता चलता है कि फसल का वानस्पतिक विकास तो भरपूर हुआ है परंतु प्रजनन अवस्था में परिवर्तित नहीं हो पाई है। दोनों फसलों का आकलन करने पर यह पूरी तरह फल विहीन पायी गई है। जबलपुर के जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के दल ने तो बुंदेलखंड में बोई गई उ़डद व तिल की किस्म को ही सेंट्रल मध्य प्रदेश के अनुकूल नहीं माना है। बुंदेलखंड में उ़डद की आजाद एक व दो, पी यू 40, पी यू 31 किस्मों और तिल की टी के जी 55 किस्म के बीजों की आपूर्ति भारतीय राज्य फ ार्म विकास निगम भोपाल ने की है। इस किस्म के उ़डद के 950 क्विंटल और तिल के 67 क्विंटल बीजों की आपूर्ति की गई। पन्ना जिले के महो़ड गांव के किसान मस्तराम राजपूत की 40 हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई तिल में फल नहीं आए है। राजपूत बताते है कि इस इलाके में तिल की प्रति हेक्टयर पैदावार 10 से 12 क्विंटल है और इसकी कीमत 5,000 रूपए प्रति क्विंटल है। इस तरह प्रति हेक्टेयर 50 हजार रूपये का तिल उत्पादन होता है। इस बार हाल बुरे हैं।
इसकी वजह विभाग के बीजों की किस्म अच्छी न होना बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीज की किस्म बुंदेलखंड के अनुकूल नहीं थी तो उसकी आपूर्ति क्यों की गई। सरकार और विभाग की चूक ने किसानों को बर्बाद कर दिया है। इसी तरह उ़डद की प्रति हेक्टयर 10 से 15 क्विंटल की पैदावार होती है। उ़डद की आजाद एक व दो, पी यू 40, पी यू 31 की किस्म जिस क्षेत्र में बोई गई थी उसमें से 7,043 हेक्टेयर में फल नहीं आए हैं। सागर संभाग के कृषि विभाग के संयुक्त संचालक डी. एल. कोरी बताते हैं कि उ़डद और तिल की फसल ब़डे पैमाने पर चौपट हुई है। इसकी वजह दोनों फसलों के बीज की किस्म है। इसी वजह से आपूर्तिकर्ता संस्थान के भुगतान पर रोक लगा दी गई है। वहीं भारतीय राज्य फ ार्म विकास निगम भोपाल के क्षेत्रीय प्रबंधक एस. सी. अग्रवाल का कहना है कि बुंदेलखंड में बरसात तो ठीक हुई लेकिन धूप के अभाव के चलते फल नहीं आए। इस क्षेत्र में कुछ इलाकों में जहां 15 जुलाई के बाद बुआई की गई है वहां पैदावार अच्छी होने की उम्मीद है। जहां तक बीज की किस्म का सवाल है वह बीज पिछले चार साल से किसानों को दिया जा रहा है। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री राजा पटैरिया का आरोप है कि बुंदेलखंड में घटिया किस्म के बीज की आपूर्ति की गई है। यह सब कृषि विभाग और प्रशासनिक अमले की सांठगांठ के चलते ही संभव हो पाया है। सरकार ने भले ही बीज आपूर्तिकर्ताओं का भुगतान रोक दिया हो, मगर बर्बाद तो किसान हुआ है।
फसल को फायदे का धंधा बनाने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज्य में किसानों के साथ क्या हो रहा है उसका बीज की किस्म ने खुलासा कर दिया है। वहीं प्रदेश के कृषि मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया का कहना है कि क्षेत्र के अनुकूल जो बीज नहीं था उसकी आपूर्ति कैसे की गई उसकी जांच कराई जाएगी, दोषियों पर कार्रवाई करने के अलावा किसानों को मुआवजा देने के प्रयास भी किए जाएंगे। सरकारी आंक़डों के मुताबिक 7,043 हेक्टेयर में 84,514 क्विंटल उ़डद का उत्पादन अनुमानित था। उ़डद की प्रति क्विंटल बाजार कीमत 4,800 रूपये है लिहाजा 40 करोड की उ़डद की फसल चौपट होने के करीब है, इसी तरह तिल की 10 करो़ड से ज्यादा की फसल बर्बाद हो रही है।  

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