भुवनेश्वर। अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली कंपनी वेदांता रिसोर्सेज ने उ़डीसा के कालाहांडी जिले में अपनी रिफायनरी के लिए बाक्साइट की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए गुजरात सरकार से बातचीत शुरू की है।
केंद्र सरकार ने नियामगिरी पह़ाडी में कंपनी की खनन परियोजना को पर्यावरण आपत्तियों के चलते मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। वेदांता एल्युमीनियम लिमिटेड के मुख्य संचालन अधिकारी मुकेश कुमार ने कहा कि कंपनी अन्य राज्यों से कच्चाा माल जुटाने की संभावनाएं तलाश रही है। पर्यावरण मंत्रालय ने वेदांता की इस रिफायनरी के करीब स्थित नियामगिरी पह़ाडी से बाक्साइट खनन की योजना नामंजूर कर दी थी। ""रिफायनरी के लिए हम प्रतिवर्ष छह लाख से आठ लाख टन बाक्साइट की आपूर्ति के उद्देश्य से गुजरात खनिज विकास निगम (जीएमडीसी) के साथ समझौता करने का प्रयास कर रहे हैं। वह पांच लाख टन बाक्साइट देने के लिए तैयार है।"" जीएमडीसी गुजरात सरकार का उपक्रम है जो खनन और खनिज विकास कार्यो में संलग्न है। उन्होंने कहा, ""पिछले कुछ दिनों में हमने जीएमडीसी अधिकारियों से कई दौर की बातचीत की है। अगले 15-20 दिन में हम किसी निर्णय पर पहुंच जाएंगे।"" वेदांता ने वर्ष 2008 में दस लाख टन एल्युमीनियम उत्पादन क्षमता वाली इस रिफायनरी की स्थापना की थी। कंपनी इस रिफायनरी के लिए कच्चाा माल गुजरात, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे अन्य प्रदेशों से मंगाती है। नियामगिरी पह़ाडी में खनन की अनुमति मिलने से कंपनी की लागत काफी कम हो जाती। कुमार ने कहा उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की थी कि निकटवर्ती इलाकों में कंपनी को खनन की अनुमति दी जाए। ""जब इस मामले (नियामगिरी में खनन) का समाधान नहीं हो रहा था तो हमने सरकार से कहा था कि हम ज्यादा समय तक इंतजार नहीं कर सकते और हमें वैकल्पिक स्त्रोतों की तलाश करनी होगी।"" उन्होंने कहा, ""लांजीगढ़ के 40 किलोमीटर के दायरे में 50-60 करो़ड टन बाक्साइड के भंडार हैं। हमने उनसे इन संसाधनों के बारे में विचार करने को कहा है।"" लांजीगढ़ में एल्युमीनियम रिफायनरी शुरू हुए तीन साल हो गए हैं लेकिन कच्चो माल की उपलब्धता हमेशा चुनौती बनी रही है। कुमार ने कहा, ""हम पिछले तीन साल से कष्ट उठा रहे हैं। हमारे संयंत्र की क्षमता 10 लाख टन है लेकिन हम पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। हम अभी तक केवल अधिकतम 80 प्रतिशत क्षमता का उपयोग कर पाए हैं।"" गुजरात की मदद लेने के बारे में उन्होंने कहा, ""वहां प्रचुर मात्रा में बाक्साइट उपलब्ध है लेकिन हम गुणवत्ता को लेकर चिंतित हैं। यहां के बाक्साइट में सिलिका का स्तर ज्यादा होता है। हम सिलिका का स्तर कम करने पर विचार कर रहे हैं।"" ""यदि इसमें हम सफल होते हैं तो कच्चो माल को हम गुजरात से समुद्री मार्ग से हम विशाखापट्टनम लाएंगे और स़डक और रेल मार्ग से अपने संयंत्र तक ले जाएंगे।""











