भोपाल। भोपाल में लगभग 26 वर्ष पहले हुए गैस हादसे से पीडित लोगों के उपचार, रिसाव के प्रभाव और पर्यावरणीय शोध के लिए भारतीय आर्युविज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने राष्ट्रीय पर्यावरणीय अनुसंधान संस्थान की स्थापना की है।
मालूम हो कि दो-तीन दिसम्बर 1984 की रात को यूनियन कार्बाइड आफ इंडिया के कारखाने से रिसी गैस ने 15 हजार से ज्यादा लोगों को मौत की नींद सुला दिया। वहीं लाखों लोग अब भी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष जारी रखे हुए है। इस हादसे के प्रभावों का पता लगाने के लिए आईसीएमआर ने अनुसंधान केंद्र की 1984 में स्थापना की गई थी मगर 1994 में बगैर किसी निष्कर्ष तक पहुंचे इसे बंद कर दिया गया था। संस्थान के उद्घाटन मौके पर प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री बाबू लाल गौर ने कहा कि 1994 में आईसीएमआर का केंद्र बंद करने का फैसला आश्चर्यजनक था। इसके बाद राज्य सरकार ने अपने स्तर पर अनुसंधान का कार्य जारी रखा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस संस्थान से गैस पीडितों के उपचार में मदद मिलेगी। भारतीय आर्युविज्ञान अनुसंधान परिषद के महानिदेशक विश्व मोहन कटोच ने कहा है कि कमला नेहरू चिकित्सालय परिसर में स्थापित संस्थान आगामी तीन माह में काम करना शुरू कर देगा। इतना ही नहीं आगामी दो वर्षो में स्वतंत्र परिसर में यह संस्थान कार्य करने लगेगा। साथ ही गौर की मांग पर पुनर्वास अनुसंधान केंद्र के सभी कर्मचारियों के नव स्थापित संस्थान में समायोजित करने की भी घोषणा की।
भारत समाचार
भोपाल गैस रिसाव के प्रभाव के शोध के लिए अनुसंधान संस्थान





















