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जून के बाद महंगा हो सकता है कर्ज: स्टेट बैंक

नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक अगले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही से कर्ज महंग कर सकता है। ब्याज दरों पर तत्काल कोई दबाव नहीं है लेकिन 2010-11 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितम्बर,2010) से ब्याज दरों में बढोतरी कर सकता है। एसबीआई के चेयरमैन ओपी भट्ट ने कहा कि जहां बैंकों की ब्याज दरों का सवाल है, मुझे नहीं लगता कि मई-जून से पहले ब्याज दरों में बढोतरी होगी। उन्होंने कहा कि मुद्रा की आपूर्ति पर दबाव है, लेकिन निकट भविष्य में ब्याज दरें स्थिर रहेगी।
भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल में अपनी मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा में आरक्षित नकदी अनुपात (सीआरआर) में 0.75 प्रतिशत की बढोतरी की थी, जिससे बैकिंग तंत्र से 36,000 करोड रूपए की नकदी कम हो जाएगी। सीआरआर में बढोतरी 13 फरवरी के बाद से दो चरणों में लागू होगी। इससे पहले निजी क्षेत्र के सबसे बडे आईसीआईसीआई बैंक की मुख्य कार्यकारी व प्रबंध निदेशक चंद कोचर ने कहा था कि अगले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही से ब्याज दरों पर दबाव बढेगा, क्योंकि निवेश के लिए ऋण की मांग से इजाफा होगा। उसके सहायक बैंक एसबीआई इंदौर का मार्च अंत तक एसबीआई में विलय हो जाएगा।
सरकार और एसबीआई के निदेशक मंडल ने पहले ही इस विलय को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। एसबीआई सौराष्ट्र का पहले ही एसबीआई में विलय हो चुका है। भट्ट ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में हमारी ऋण की वृद्धि दर 16 से 18 प्रतिशत के बीच रहेगी। फिलहाल यह 17 प्रतिशत पर है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष में ऋण की वृद्धि दर 16 से 18 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

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