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भारत समाचार

"क्विज गन मुरूगन": बंदूक का दम

बैनर: ए फैट फिश मोशन पिक्चर्स, फॉक्स स्टार स्टूडियो
निर्देशक: शशांक घोष
कलाकार: राजेंद्र प्रसाद, विनय पाठक, रणवीर शौरी, संघ्या मृदुल, रम्भा, अश्विन मुश्रान

समीक्षा: साउथ की फिल्मों में सुपर हीरों का ट्रेंड बरसों से चल रहा है। साउथ में सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों के अलावा छोटे सेंटरों में भी इन फिल्मों को देखने वालों की एक अलग क्लास है। इस सप्ताह रिलीज हुई "क्विकगन मुरूगन" भी कुछ ऎसी ही फिल्म है। हिंदी फिल्मों के शौकीनों के लिए कुछ अटपटे नाम वाली इस फिल्म का नायक मुरूगन(डॉ. राजेंद्र प्रसाद) ऎसा सुपरहीरों है, जो बंदुक के दम पर बडी से बडी करामात कर सकता है। दक्षिण भारतीय यह काउबॉय "क्विकगन मुरूगन" लोगों की सुरक्षा और सेवा करना अपना घर्म समझता है। फिल्म "क्विकगन मुरूगन" के एडवेंचर और उसके दुश्मन राइस प्लेट रेड्डी(नासिर)के साथ उसकी जंग की कहानी है। इस दौरान क्विकगन घरती से स्वर्गलोक तक की यात्रा कर लेता है। उसके अडवेंचर का सफर दक्षिण भारत के एक छोटे से गांव से शुरू होती है, जो बाद में स्वर्गलोक होता हुआ मुंबई पहुंच जाता है। वहीं क्विकगन की प्रेम कहानी भी कम रोचक नही है।
एक नायक है और उसकी दो प्रेमिकाएं। मैंगो डॉली(रंभा) उसे मन ही मन चाहती है, तो क्विकगन का पहला प्यार है लॉकेट लवर। मुरूगन को हर कदम पर अपने पहले लॉकेट प्यार का साथ मिलता है, तो मुश्किल की घडी में मैगो उसका साथ देती है। फिल्म में डायलॉग कम और गन से निकलती गोलियों की आवाज कही ज्यादा है।
कहानी का हर पात्र अजीबोगरीब हरकतें करते नजर आता है। कोई मसाला डोसा को इंटरनैशनल ब्रैंड बनाकर दुनिया में अपने नाम का डंका बजाना चाहता है, तो कोई जुल्म की दुनिया का बादशाह बनना चाहता है।

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