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भारत समाचार

स्वादिष्ट नही है "लव खिचडी"

निर्माता: कृष्ण कुमार पिट्टी
निर्देशक: श्रीनिवास भाश्याम
संगीत: प्रीतम चक्रवर्ती
कलाकार: रणदीप हुड्डा, रिया सेन, दिव्या दत्ता, सोनाली कुलकर्णी, रितुपर्णा सेनगुप्ता, कल्पना पंडित, जेसी रंघावा, सदा सौरभ शुक्ला, संजय मिश्रा।

समीक्षा: निर्देशक श्रीनिवास भाश्याम ने अपनी फिल्म "लव खिचडी" में छोटी-सी बात को कहने में ज्यादा समय ले लिया। इस फिल्म को ज्यादा से ज्यादा डेढ घंटे में समेटना था, लेकिन दो घंटे से भी ज्यादा का समय ले लिया, जिससे खिचडी का स्वाद बिगड गया और वह बेस्वाद हो गई। आजकल युवाओं का एक वर्ग ऎसा भी है, जो लडकियों के साथ अपने रिश्ते में सिर्फ मौज-मस्ती चाहता है। वे किसी भी किस्म की प्रतिबद्धता नही चाहते। इसी विचार को लेकर निर्देशक श्रीनिवास ने "लव खिचडी" बनाई, लेकिन इसका निर्वाह वे ठीक से नही कर पाएं। कहानी है वीर प्रताप सिंह(रणदीप हुड्डा)की। छोटे शहर का रहने वाला वीरमुंबई के एक फाइव स्टार होटल में शेफ है। खुद का एक रेस्तरां हो, यह वीर का सपना है। हैडसम वीर हर आने-जाने वाली स्त्री को फ्लर्ट करता है। चाहे उसके घर में काम करने वाली नौकरानी ही क्यों न हो। हर स्त्री पर उसकी नजर है। उसकी जिंदगी में सात महिलाएं आती है, और उसे क्या अनुभव होता है, यह फिल्म का सार है।
सोनाली कुलकर्णी और रिया सेन के किरदारों को छोड दिया जाए, तो अन्य महिलाओं के पात्रों को ठीक से पेश नही किया गया है। सदा पूरी फिल्म में भ्रमित नजर आती है। रितुपर्णा अंत तक ये बात क्यों छिपाती है कि वे विवाहित है। इस तरह की कई बातों को निर्देशक स्पष्ट नही कर पाएं। कुल मिलाकर यह खिचडी स्वादिष्ट नही है।

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