नई दिल्ली, 12 सितंबर। यमुना नदी खतरे का निशान पार कर गई है। इससे इसकी गोद में बसी राजधानी दिल्ली के लिए खतरा बढ गया है। बाढ से लोगों को बचाने के लिए प्रशासन ने यमुना के निचले इलाकों को खाली करा लिया है और वहां बसे लोगों को टेंटों में भेजा गया है। इसके लिए प्रशासन ने सात स्थानों पर टेंट लगाए हैं। इसी के साथ प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि अगर जलस्तर और बढता है, तो यमुना पर बने लोहे के पुराने ब्रिज को बंद कर दिया जाए। हरियाणा से लगातार छोडे जा रहे पानी के कारण दिल्ली में यमुना का जलस्तर खतरे के निशान 204.83 मीटर को पार कर गया है। पूर्वानुमान के मुताबिक, यमुना का स्तर शनिवार को 205 मीटर पार कर जाएगा। हरियाणा ने शनिवार सुबह भी 58 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी यमुना में छोडा है। दिल्ली के सिंचाई एवं बाढ नियंत्रण विभाग के चीफ इंजीनियर ईश कुमार के मुताबिक बाढ का पानी यमुना में गिरने वाले नालों के जरिए शहर में न घुसे, इसके लिए मैटकॉफ हाउस नाला, तांगा स्टैंड, विजय घाट और बुराडी के पास गिरने वाली सप्लीमेंट्री ड्रेन के नालों के गेट बंद कर दिए गए हैं। इन नालों का पानी यमुना में डालने के लिए 100 पंप पाइप लगाए गए हैं। उधर, बचाव और राहत कार्य देख रहे ईस्ट दिल्ली के एडीएम वंशराज के मुताबिक गढी मांडू, उस्मानपुरा, चिल्ला, बदरपुर, खजूरी खास और ओखला के आसपास के इलाके खाली करा लिए गए हैं। इन गांवों को अक्षरधाम पुश्ता, रेलवे ओवर ब्रिज, गांधीनगर के निकट सात स्थानों पर लगाए गए टेंटों में भेजा जा रहा है। टेंटों में मेडिकल सुविधा और पानी का इंतजाम किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि किसी भी खतरे से निपटने के लिए रेस्क्यू फोर्स तैनात कर दी गई है। 50 बोट निगरानी के लिए लगाई गई हैं। 15 गोताखोरों को 24 घंटे तैनात किया गया है।