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भारत समाचार

सरकार पर ब्याज दरों में और कटौती का दबाव

नई दिल्ली, 12 सितंबर। उद्योग जगत ने सरकार पर ब्याज दरों में और कटौती करने का दबाव बढा दिया है। शुक्रवार को देश के तीनों प्रमुख उद्योग चैंबर-फिक्की, सीआईआई और एसोचैम ने एक स्वर में सरकार से कहा है कि अर्थव्यवस्था में तेज सुघार के लिए उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि इंडस्ट्री को आसान दर पर कर्ज मिलता रहे। फिक्की के महासचिव अमित मिश्रा ने तो कहा है कि औद्योगिक क्षेत्र बेहद चिंताजनक हालात से गुजर रहा है और इसमें सुघार करने के लिए कर्ज को और सस्ता बनाना बेहद जरूरी है। जानकारों का मानना है कि उद्योग की इस मांग पर सरकार अमल करेगी, इसकी संभावना कम ही है। रिजर्व बैंक (आरबीआई) की डिप्टी गर्वनर उषा थोराट ने शुक्रवार को इस बात के संकेत भी दिए कि केद्रीय बैंक कर्ज को आसान बनाने की अपनी नीति को बदल सकता है।
इसका साफ मतलब हुआ कि आने वाले दिनों में कर्ज को महंगा किया जा सकता है। गौरतलब है कि ग्लोबल मंदी को देखते हुए सितंबर 2008 के बाद से रिजर्व बैंक ने कर्ज को सस्ता करने के लिए नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर), रेपो रेट सहित अन्य वैघानिक दरों को घटाया है। अब चूंकि मुद्रास्फीति की दर एक बार फिर बढने लगी है, इसलिए माना जा रहा है कि ब्याज दरों को लेकर केद्रीय बैंक अपने रूख में बदलाव कर सकता है। इससे उद्योग जगत में बैचेनी है।

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