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भारत समाचार

दहशतगर्दी के लिए देश में पहुंचा गोला-बारूदक्

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर। राजस्थान के ब़ाडमेर में पक़डे गए तस्करों की सूचनाओं को सही मानें तो देश में दहशत फैलाने के लिए वे पहले ही भारी मात्रा में गोला-बारूद आतंकियों तक पहुंचा चुके हैं। ब़ाडमेर में पक़डी गई खेप तो पांचवीं थी। पुलिस के हत्थे चढ़े गोला-बारूद के तस्कर और बब्बर खासला के दो आतंकियों से अब तक की पूछताछ ने राजस्थान पुलिस के हाथ-पांव फुला दिए हैं। पश्चिमी सीमा पर ब़ाडमेर के पास बरामद गोला-बारूद का जखीरा तो पांचवीं खेप थी। इससे पहले चार खेप वे आतंकियों तक पहुंचा चुके हैं। पांचवीं खेप की डिलीवरी के वक्त पुलिस के हत्थे चढ़े तस्कर सोढ़ा खान और इससे जु़डे दूसरे तस्करों से पूछताछ में यह खुलासा हुआ है। सोढा खान से पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि सबसे पहले मार्च 2009 में उसने माल की डिलीवरी रामदा को की थी। गुजरात का तस्कर रामदा फिलहाल गुजरात की ही जेल में बंद है। यह माल पाकिस्तान के आलिया के आदेश पर फोटिया लेकर आया था। दूसरी बार आलिया ने फिर सामान भिजवाया।
आलिया की कॉल पर सोढा ने माल की डिलीवरी मुबारक को की थी, तीसरी बार डिलीवरी लेने शेरू आया था, चौथी बार फिर सोढ़ा ने मुबारक को माल डिलीवर किया था। पुलिस की नई मुसीबत अब जखीरे की वे चार खेप हैं, जो उसकी पहुंच से बाहर है। पुलिस अब तस्कर शेरू, मुबारक और बब्बर खालसा के आंतकी हरजोत की तलाश कर रही है। पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली कि पिछली चार खेप की डिलीवरी मुबारक और शेरू ने हरजोत को की थी, लेकिन तबाही के सामान और आतंक के नेटवर्क के खुलासे में पुलिस की ब़डी अ़डचन है कोड नेम।
आईएसआई ने अपने गुर्गो की पहचान छुपाने के लिए कोड नाम दे रखा है। सोढा खान ने पूछताछ में बताया कि यदि उसके और दूसरे तस्कर खानिया में समझौता नहीं होता, तो शायद गोला-बारूद की पांचवीं खेप पुलिस को नहीं मिल पाती। इस पूछताछ में एक और खुलासा हुआ है। अब इंडिया में गोला-बारूद की डिलीवरी के लिए पाकिस्तान में बैठे उनके आकाओं ने रूट बदल दिया है। पहले वे डिलीवरी जम्मू-कश्मीर और पंजाब बॉर्डर से होती थी, लेकिन वहां सख्ती बढ़ने पर अब ब़ाडमेर-जैसलमेर से माल परमजीत सिंह उर्फ पम्मा की मॉनीटरिंग में हो रहा था।

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