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ओलंपिक मेजबानी मिली रियो डि जेनेरिया को

यह पहला अवसर होगा जबकि दक्षिण अमेरीकी के किसी शहर में इन खेलों का आयोजन किया जाएगा। रियो डि जेनेरियों के लिए हालांकि मेजबानी हासिल करना आसान नहीं रहा। होनोलुलु में जन्मे ओबामा अपेन विरोधियों की आलोचना को दरकिनार करके शिकागो का पक्ष रखने के लिए स्वयं यहां मौजूद थे। वह डेनमार्क की राजधानी में जितने समय भी रहे उनका एकमात्र एजेंडा शिकागो को मेजबानी दिलवाना रहा।
अमेरीकी की प्रथम महिला मिशेल ओबामा ने भी कोई कसर नहीं छोडी। वह शिकागों की रहने वाली है और बुधवार से उन्होंने यहां कई बैठकों में भाग लिया लेकिन उनका जादू भी मतदाताओं को नहीं रिझा पाया। मिशेल ने वादा किया था, हम इन खेलों को दुनिया तक पहुंचने के लिए वाहन क तरह उपयोग करेंगे। लेकिन यह सब काम नहीं आया तथा शिकागें मतदान के पहले दौर में बाहर हो गया। शिकांगो की तरह टोक्यो ने भी काफी कोशिश की थी। ओबामा के बाद जापान के प्रधानमंत्री युकी होतोयामा ने प्रभावशाली प्रस्तुति दी थी और बताया कि पर्यारवरणीय दृष्टि से टोक्यो का ग्रीन ओलंपिक का आयोजन करना कितना महत्वपूर्ण है।




















