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भारत समाचार

कर्नाटक-आंध्र में पानी सरकार के सिर ऊपर से गुजरा

बेंगलुरू/हैदराबाद, 5 अक्टूबर। आंध्र प्रदेश में बाढ़ से 18 लाख प्रभावित हुए हैं। नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बांध पानी से लबालब भरे हुए हैं। शहर समंदर बन गए हैं और लोगों के घर टापू में तब्दील हो गए हैं। मौत से जूझते लोग जिंदगी की दुआ कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश के पांच जिले और वहां के 18 लाख लोग पानी से घिरे हुए हैं। धीरे-धीरे पानी और ऊपर बढ़ता जा रहा है। विजयव़ाडा के बाहरी इलाके में स्थित श्रीप्रकाशम बैराज लबालब भरा हुआ है। बाढ़ के बावजूद नागार्जुन सागर बांध से 10 लाख क्यूसेक पानी छो़डा गया है, जो श्रीप्रकाशम बैराज तक पहुंच गया है। श्रीप्रकाशम बैराज से भी 7.06 लाख क्यूसेक पानी छो़डा जा चुका है। विजयव़ाडा में जल-सैलाब के कहर को देख मुख्यमंत्री के. रोसैया के माथे पर चिंता की रेखाएं खिंच गईं। खराब मौसम के बावूजद रोसैया ने हेलिकॉप्टर से इलाके का मुआयना किया। विजयव़ाडा में हाई अलर्ट घोषित करने के बाद सरकार ने वहां फंसे हुए लोगों को भी हटाना शुरू कर दिया है। अब तक इस शहर से दो लाख से ज्यादा लोग हटाए जा चुके हैं। भवानीपुरम, रामलिंगेश्वरम नगर, कृष्ण लंका आदि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से करीब 50-60 लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। इसके अलावा एयरपोर्ट के 14 हेलिकॉप्टरों से भी लगातार मदद ली जा रही है।
राहत कार्य में और तेजी लाने के लिए सरकार ने हेलिकॉप्टरों के ईंधन भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचाना शुरू कर दिया है, ताकि उन्हें बार-बार तेल भराने के लिए बेस कैंप में न आना प़डे। आंध्र प्रदेश में बाढ़ का जायजा लेने के लिए यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी सोमवार को हैदराबाद पहुंच रही हैं। यहां से वह बाढ़ और बारिश से हुई तबाही का हवाई सर्वेक्षण करेंगी। आंध्र प्रदेश में अब तक 38 लोगों को मरने की पुष्टि हो चुकी है। उधर, कर्नाटक में भी हालात लगातार बिग़ड रहे हैं। सिर्फ एक दिन में वहां 24 हजार से ज्याद मकान गिर चुके हैं।
हालत यह है कि दो दिन पहले कारव़ाड में जमीन धंसने से दफन 21 लोगों को अब तक नहीं निकाला जा सका है। प्रशासन ने इन लोगों के बचने की उम्मीद छो़ड दी है। बढ़ते हुए पानी के साथ ही कर्नाटक में बाढ़ से मरने वालों का आंक़डा भी बढ़ता जा रहा है। छह दिनों से लगातार बरस रहे बादल रूकने का नाम नहीं ले रहे हैं।
उत्तर कन्ऩड जिले के कारव़ाड में शनिवार को जमीन धंसने से फंसे 21 लोगों को निकालने में दो-दो टीमें लगी हुई है, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिल सकी है। खुद सरकार का कहना है कि इस हादसे में मारे गए लोगों की तलाश अब तभी हो पाएगी जब बारिश और बाढ़ का पानी कम होगा। सरकारी आंक़डों के मुताबिक बीजापुर में 31, बागलकोट में 25, रायचूर में 24, कोप्पल में 20, गुलबर्गा में 19, बेल्लारी में 14 और बेलगाम में 7 लोगों की मौत हो जुकी है। कर्नाटक ने पिछले 100 सालों में ऎसी बाढ़ नहीं देखी है। वायुसेना की मदद से प्रशासन लगातार लोगों को सुरक्षित ठिकाने तक पहुंचाने में जुटा है।
सरकार के मुतबिक 6 दिनों की बारिश ने एक लाख 2 हजार घरों को ध्वस्त कर दिया है और 1 लाख 77 हजार लोगों को अपना घर छो़डना प़डा है। बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए वायुसेना के हेलिकॉप्टर लगातार उ़डान भर रहे हैं। केंद्र सरकार ने भी कर्नाटक की मदद के लिए आठ हेलिकाप्टर और 73 मोटरबोट भेजी हैं। एक हजार से ज्यादा सीआरपीएफ के जवानों को भी बचाव और राहत के काम में झोंक दिया गया है।

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