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निजी फोन कंपनियों पर सीबीआई का छापा

उन्होंने पद से इस्तीफा देने से भी इनकार किया है। प्रवक्ता ने बताया कि जी 2 स्पेक्ट्र लाइसैंस जारी किये जाने के मामले मे अनियमितताओं के आरोपों के बाद केन्द्रीय सतर्कता आयोग ने कंपनियों की चयन प्रक्रिया की जांच सीबीआई से कराने की सिफरिश की थी। आरोप है कि जनवरी 2008 में 2 जी स्पेक्ट्रम लाइसैंस देने में दूरसंचार विभाग और कुछ निजी, व्यक्तियों ने भारतीय दूर संचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की सिफारिशों को नजरंदाज किया और खुली निविदाएं आतंत्रित करने के बजाय पहले "पहले आओ पहले पाओ" के आधार पर लाइसैंस जारी किये। उल्लेखनीय है कि जनवरी 2008 में आठ नयी कंपनियों को ये लाइसैंस जारी किये गये। इस मामले में तब उंगली उठने लगी जब इनमें से कुछ कंपनियों ने लाइसैंस मिलने के चंद दिन बाद ही अपनी हिस्सेदारी मोटी प्रीमियम लेकर अन्य कंपनियों का बचे दी। सरकार ने पूरे देश में 2 जी स्पेक्ट्रम सेवाओं के लाइसैंस 1651 करोड रूपए में जारी किये थे। दूरसंचार मंत्रालय पर ये लाइसैंस औने-पौने दाम में बेचने का आरोप भी लगाया गया।




















