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भारत समाचार

20 साल की बादशाहत

नई दिल्ली। आज ही के दिन ठीक 20 साल पहले जब मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने इंडियन कैप पहना था तो, किसी ने सोचा भी नहीं था कि यह सफर इतना शानदार और लंबा होगा। लेकिन क्रिकेट की दुनिया में आज सचिन वह नाम है जिसने कीर्तिमान क्या, इसके मापदंड को भी इतना ऊंचा कर दिया कि आनेवाले कई सालों में वहां तक पहुंचना किसी के बूते की बात नहीं। ऎसे में उनके समकक्ष और कभी सचिन के साथ अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के दिग्गज माने जाने वाले ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज मैथ्यू हेडेन का बयान ही याद आता हैं, जिसमें उन्होंने कहा था, "मैंने भगवान को देखा हैं, वह इंडिया के लिए नंबर 4 पर बल्लेबाजी करता हैं।"
क्रिकेट की दुनिया में शायद ही कोई ऎसा जानकार होगा जिसने सचिन के बारे में टिप्पणी नहीं की होगी। मुंबई के इस बल्लेबाज की प्रतिभा बचपन में ही नजर आने लगी थीं, जब उन्होंने अपने साथी विनोद कांबली के साथ 1988 में लॉर्ड हैरिस शील्ड अंतर स्कूल मैच में 664 रन की नाबाद साझेदारी की। बहरहाल, रविवार को सचिन ने इंटरनेशनल क्रिकेट में 20 साल पूरे कर लिए। इसके साथ ही वह खेल के इतिहास में यह उपलब्धि हासिल करने वाले भारत के पहले और दुनिया के 16वें क्रिकेटर बन गए हैं। पाकिस्तान के खिलाफ 15 नवंबर 1989 को 16 साल की उम्र में सचिन पहली बार किसी इंटरनेशनल मैच में मैदान में उतरे थे। तेंदुलकर सोमवार को अहमदाबाद में जब श्रीलंका के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज के पहले टेस्ट में उतरेंगे, तो उनका करियर 20 साल और एक दिन का होगा।
अब तक के टेस्ट करियर में तेंदुलकर ने रिकॉर्ड 159 टेस्ट मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया हैं। उन्होंने 19 साल और 325 दिन के अपने वनडे करियर में रिकॉर्ड 436 वनडे मैच भी खेले और पाकिस्तान के जावेद मियादाद के बाद उनका वनडे करियर सबसे लंबा हैं। सबसे लंबे टेस्ट करियर वाले प्लेयर्स की लिस्ट में वहीं अकेले खिलाडी हैं, जो अभी सक्रिय तौर पर क्रिकेट खेल रहे हैं। 36 बरस का यह खिलाडी अब भी लगातार मजबूत होता जा रहा हैं।
सचिन के नाम वनडे और टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन और शतक का रेकॉर्ड हैं, लेकिन फिर भी रनों के लिए उनकी भूख अभी खत्म नहीं हुई हैं। इस दिग्गज बल्लेबाज ने अब तक 159 टेस्ट में 54.58 के औसत के साथ 12,773 रन बनाए हैं। इसमें 42 शतक और 53 अर्धशतक शामिल हैं। वनडे में भी कोई भी बल्लेबाज तेंदुलकर के करीब नहीं हैं। मुंबई का यह बल्लेबाज हाल ही में वनडे मैचों में 17,000 रन पूरे करने वाला दुनिया का पहला बल्लेबाज बना। तेंदुलकर ने 436 वनडे मैचों में 17,173 रन बनाए हैं। सचिन वनडे और टेस्ट मैचों में 30,000 रन से सिर्फ 39 रन दूर हैं। सचिन ने टेस्ट मैचों में 44 और वनडे में 154 विकेट भी लिए।
इस स्टार बल्लेबाज ने पाकिस्तान के खिलाफ 66 मैचों में 2381 रन बनाए है। इसके अलावा उन्होंने दक्षिण अफ्रीका (1655), वेस्टइंडिज (1571), न्यूजीलैंड (1460), जिम्बाब्वे (1377) और इंग्लैंड (1274) के खिलाफ भी एक हजार से अधिक रन बनाए हैं। सचिन ने घरेलू सरजमीं पर 142 मैच में 46.12 की औसत से 5766 और विदेशी सरजमीं पर 127 मैच में 35.48 की औसत से 4187 रन बनाए हैं लेकिन वह सबसे अधिक सफल तटस्थ स्थानों पर रहे हैं जहां उन्होंने 140 मैच में 6054 रन बनाए हैं और उनका औसत 50.87 हैं। वह भारत के अलावा इंग्लैंड (1051), दक्षिण अफ्रीका (1414), श्रीलंका (1302) और संयुक्त अरब अमीरात (1778) की धरती पर भी एक दिवसीय मैचों में एक हजार रन बना चुके हैं।
पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरूद्दीन ने तेंदुलकर को सलामी बल्लेबाज के तौर पर भेजने की शुरूआत की थीं जिसमें मुंबई का यह बल्लेबाज खासा सफल रहा। ओपनर के तौर पर उन्होंने 12,891 रन बनाए हैं। जहां तक कप्तानों का सवाल है तो सचिन सबसे अधिक सफल अजहर की कप्तानी में रहे। उन्होंने अजहर के कप्तान रहते हुए 160 मैच में 6270 रन बनाए जबकि गांगुली की कप्तानी में 101 मैच में 4490 रन ठोके। हालांकि स्वयं की कप्तानी में वह अधिक सफल नहीं रहे और 73 मैच में 37.75 की औसत से 2454 रन ही बना पाए। सचिन 42 साल की उम्र तक खेलते रहने की चाह लिए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में धूम मचाते जा रहे हैं। लोग उनके संन्यास को लेकर भले ही कयास लगाते रहे लेकिन सचिन मानसिक व शारीरिक रूप से पूरी तरह से फिट हैं। देश के लिए खेलते रहने का जुनून उन्हें बल्ले से कमाल करने के लिए प्रेरित करता हैं। उनके लक्ष्य में भारत के दिए विश्व कप जीतना सबसे पहले हैं, और उम्मीद की जानी चाहिए की इस बार वे अपने मकसद में कामयाब रहेंगे।
अपनी शारीरिक व मानसिक दृढता पर पूरा-पूरा भरोसा जताते हुए सचिन ने अब यह संकेत भी दे दिया है कि उनका मिशन 2015 तक खेलने का है। अर्थात वे 42 साल की उम्र तक खेलते रहना चाहते हैं। सचिन की इस तमन्ना से यह तो तय है कि अगले छह साल में उनके बल्ले से ढेरों कीर्तिमान बनेंगे, लेकिन उससे ज्यादा इस बात की चर्चा अवश्य होगी कि वे इतने दिनों तक फिट रहने के लिए क्या-क्या करेंगे। अपनी फिटनेस का राज खोलते हुए सचिन ने मीडिया से कहा कि योगासन, लगातार जिम जाने और मैदानी व्यायाम करते रहने से कोई भी खिलाडी लंबे समय तक फिट रह सकता हैं।
उनका कहना है कि प्रत्येक खिलाडी का अपना डाइट चार्ट होना चाहिए। यदि अपने शारीरिक शक्ति पर जीत दर्ज कर ली तो उसके बाद मानसिक शक्ति को मजबूत बनाना आवश्यक हैं।
मास्टर ब्लास्टर कहते है, सच तो यह है कि एग्रेशन सिर्फ दिलों-दिमाग में होना चाहिए, न कि सिर्फ शारीरिक स्तर पर। स्वयं के बारे में सचिन ने कहा, क्रिकेट मेरी जिंदगी हैं। धन कमाना ही मेरा उद्देश्य नहीं है बल्कि देश के लिए खेलने का जुनून ही क्रिकेट से दूर होने के बारे मे सोचने नहीं देता हैं। सचिन कहते है कि मुझे कई बार इंजुरी के कारण क्रिकेट से दूर रहना पडा। कभी टेनिस एल्बों तो कभी कमर के दर्द के कारण लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। हां, चोट का फायदा यह हुआ कि मुझे कुछ दिनों के लिए आराम मिल जाता था, जिससे मैं तरोताजा होकर वापसी करता था और रन जुटाने लग जाता था। बहरहाल, सचिन जैसी प्रतिभा को शब्दों में नहीं समेटा जा सकता हैं, सुनील गावस्कर और विवियन रिर्चड्स जैसे महान खिलाडी उनके कायल हैं और लता मंगेशकर और अमिताभ बच्चन जैसी हस्तियों को उन पर गर्व हैं।
कीर्तिमान स्थापित:
0 एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले में सबसे ज्यादा रन
0 एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले में सबसे ज्यादा शतक
0 एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय के विश्व कप मुकाबलों में सबसे ज्यादा रन
0 टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक
0 रिकार्डो के बादशाह सचिन तेंदुलकर श्रीलंका के खिलाफ अपनी 35 रन की पारी के दौरान एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 16,000 रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाज बने।
0 टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रनों का कीर्तिमान 0 टेस्ट क्रिकेट में 12,000 रन बनाने वाले विश्व के पहले बल्लेबाज।
खेल पद्धति:
सचिन तेंदुलकर उभयहस्त हैं। वे गेंदबाजी और बल्लेबाजी दायें हाथ से करते हैं लेकिन लिखते बाये हाथ से है। वे नियमित तौर पर बायें हाथ से गेंद फेंकने का अभ्यास करते हैं। उनकी बल्लेबाजी उनके बेहतरीन संतुलन व नियंत्रण पर आधारित हैं। वे भारत की धीमी पिचों की बजाय वेस्ट इंडीज और ऑस्ट्रेलिया की सख्त व तेज पिच पर खेलना ज्यादा पसंद करते हैं। वे अपनी बल्लेबाजी की अनूठी पंच शैली के लिए भी जाने जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रशिक्षक जॉन ब्यूकैनन का मानना है कि तेंदुलकर अपनी पारी की शुरूआत मे शार्ट गेंद के ग्रहणशील हैं। उनका यह भी मानना है कि बायें हाथ की तेज गेंद तेंदुलकर की कमजोरी हैं। अपने करियर के शुरूआत में सचिन की खेल शैली आक्रमणकारी हुआ करती थीं। सन 2004 से वे कई बार चोटग्रस्त रहे हैं। इस वजह से उनकी बल्लेबाजी की आक्रामकता में थोडी कमी आई हैं। पूर्व ऑस्ट्रेलिया खिलाडी ईयन चैपल का मानना है कि सचिन अब पहले जैसे खिलाडी नहीं रहे। लेकिन 2008 में भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर सचिन ने कई बार अपनी आक्रामक बल्लेबाजी का परिचय दिया। सचिन नियमित गेंदबाज नही हैं। किंतु वे मध्यम तेज, लेग स्पिन व ऑफ स्पिन गेंदबाजी में प्रखर हैं। वे कई बार लंबी देर से टिकी हुई बल्लेबाजी की जोडी को तोडने के लिए गेंदबाज के रूप में लाए जाते हैं। भारत की जीत पक्की कराने में अनेक बार उनकी गेंदबाजी का प्रमुख योगदान रहा हैं।

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