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नहीं रही अनारकली

जिन दिनों बीना राय ने फिल्मों में कदम रखा, उस दिनों लडकियों का फिल्मों में अभिनय को अच्छी निगाह से नहीं देखा जाता था। घर वालों को फिल्मों में काम करने और मुंबई जाकर रहने के लिए राजी करनी पडी। कहा तो यहां तक जाता है कि उन्होंने घर वालों को मनाने के लिए भूख हडताल कर दी थी। लखनऊ के ताल्लुकदार कॉलेज में पढाई के दौरान उन्होंने एक टैलेट कान्टेस्ट में भाग लिया और चुन ली गई। पचास के दशक में उन्हें 25 हजार का पहला पुरस्कार मिला, जो उन दिनों बढी रकम थी।
पुरस्कार लेने वह मुंबई गई। इस प्रतियोगिता में शिरकत की वजह से उनको किशोर साहु की फिल्म "काली घटा" मिली। फिल्म के हीरों खुद किशोर साहू थे। फिल्म "औरत" के निर्माण के दौरान अभिनेता प्रेमनाथ से बीना को प्यार हो गया। "औरत" तो बाक्स ऑफिस पर नहीं चली, लेकिन शादी के बाद दोनों की जिंदगी की गाडी चल पडी। उन्होने अपने पति प्रेमनाथ के साथ कई फिल्मों में काम किया। पति-पत्नी ने मिलकर फिल्म प्रॉडक्शन हाउस खोला और 1954 में फिल्म "शगूफा" का निर्माण किया।




















