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घायल मजदूर की मौत से लुधियाना में फिर तनाव

यह मामला तीन दिन बाद वीरवार की शाम तब सामने आया जब फोकल प्वाइंट के मजदूरों की भी़ड अमिर की मौत का समाचार सुनकर परिसर में जमा हो गई। माहौल गरमाने पर हुए पोस्टमार्टम में हुए मजदूर के शव से गोली निकलने का समाचार है, हालांकि पुलिस के उच्चा अधिकारी इंकार करते हैं। पता चला है कि मृतकों को घायल अवस्था में 7 दिसम्बर के दिन पहले सीएमसी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, वहां से उसे सिविल अस्पताल में भेज दिया गया, जहां 8 दिसम्बर को उसकी मौत हो गई।
सूत्रों के अनुसार अमिर हसन को गोली लगने और हिंसक उपद्रव के बाद कफ्यू लग जाने की स्थिति के कारण उसके परिजनों ने उसका दो दिन तक घर पर ही इलाज करवाया था, जहां डाक्टर ने बताया था कि इसके पेट की आतंडियां फट चुकी हैं और काफी खून बहने के हालात के कारण स्थिति नाजुक हैं और ऑपरेशन करना प़डेगा। इसी उपद्रव के दौरान एक अन्य व्यक्ति नरेश कुमार की भी कल भर्ती हुई है, उसके परिजनों का भी आरोप है कि नरेश को उपद्रव के दौरान पैरों में गोली लगी थी।
बहरहाल पुलिस इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उक्त दोनों व्यक्ति घटनास्थल पर थे भी या नहीं जबकि अमिर हसन की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मामले की सच्चााई का पता चलेगा। उक्त मौत के बाद साहनेवाल क्षेत्र और फोकल प्वांइट एरिया में प्रवासी मजदूरों के दिलों में काफी दहशत पाई जा रही है। मृतक का बेटा मुहम्मद कुतबद्दीन अली मौत का समाचार पाकर लुधियाना पहुंच चुका है।
उधर दूसरी तरफ शहर में फूटे मजदूरों के आक्रोश, हिंसा और आगजनी की में जुटी पुलिस अभी तक यह नहीं समझ पा रही हे कि लुधियाना आक्रोश पूर्व नियोजित था, या फिर पुलिस की लापरवाही के चलते मजदूरों का गुस्सा फू टा जबकि लुधियाना के डीसी विकास गर्ग और एसएसपी डा. सुखचैन सिंह गिल का दावा है कि लुधियाना उपद्रव साजिश के चलते हुआ है।




















