नई दिल्ली। देश में तीसरी पीढ़ी (3जी) की संचार सेवा शुरू करने को लेकर निजी कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटित करने के लिए जारी नीलामी 34 दिन बाद बुधवार को समाप्त हुई।
इस नीलामी से सरकारी खजाने में करीब 70,000 करो़ड रूपए (15.5 अरब डॉलर) आएंगे। पूरे भारत के लिए लाइसेंस प्राप्त करने वाली कंपनी को 17,000 करो़ड रूपए (3.7 अरब डॉलर) खर्च करने होंगे। सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनियों भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) को पहले ही स्पेक्ट्रम का आवंटन किया जा चुका है। इन कंपनियों को भी विजेता कंपनी के बराबर की कीमत चुकानी प़डेगी। भारती एयरटेल, रिलायंस कम्युनिकेशन, वोडाफोन एस्सार, आइडिया सेल्युलर, टाटा टेलीसर्विसेस, एयरसेल, एटीस्लेट, एस टेल और वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस जैसी नौ कंपनियों ने नौ अप्रैल को शुरू हुई ऑनलाइन नीलामी में हिस्सा लिया।
राष्ट्रीय अवकाश और रविवार को छो़डकर बाकी सभी दिन नीलामी की प्रक्रिया चली। बोली का आंक़डा, जिसमें विजेता कंपनी का नाम भी शामिल है, की घोषणा नीलामी प्रक्रिया पूर्ण होने और सरकार द्वारा मंजूरी मिलने के बाद सार्वजनिक किया जाएगा। विजेता कंपनी अब से 10 दिनों के भीतर आवश्यक धनराशि जमा कर देगी। नीलामी में सफल कंपनियों को एक सितंबर से वाणिज्यिक आधार पर 3जी सेवाओं को शुरू करने की अनुमति प्राप्त हो जाएगी।





















