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भारत समाचार

सर्वदलीय दल श्रीनगर पहुंचा, अलगावादी रखेंगी दूरी

नई दिल्ली। दिल्ली से केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम की अगुवाई में सोमवार को दो दिनों के कश्मरी दौरे पर रवाना हुआ एक सर्वदलीय प्रतिनिçीधमंडल श्रीनगर पहुंच गया है। यह प्रतिनिधिमंडल पिछले तीन महीनों से हिंसक प्रदर्शनों और कफ्र्यू का सामना कर रहे कश्मीर में स्थिति का जायजा लेगा और वहां सभी राजनीतिक दलों से चर्चा करेगा। सभी दलों के नेताओं का अलगाववादी नेताओं से भी मुलाकात करने का प्रयास होगा, लेकिन उनकी तरफ से अब तक मिल रही प्रतिक्रियाओं के मुताबिक वे प्रतिनिधिमंडल से दूरी बनाकर रखेंगे। राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती ने भी सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं करने की घोषणा कर दी है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गत 15 सितंबर को कश्मीर की स्थिति पर विचार करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसमें एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल वहां भेजने का फैसला किया गया था।
इस प्रतिनिधिमंडल में भारतीय जनता पार्टी की ओर से लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और अरूण जेटली, समाजवादी पार्टी से मुलायम सिंह यादव, डीएमके से टीआर बालू, लोकजनशक्ति पार्टी से रामविलास पासवान, जनता दल युनाइटेड से शरद यादव और राष्ट्रीय जलता दल का प्रतिनिधित्व लालू प्रसाद करेंगे। इसके अलावा इसमें तृणमूल कांग्रेस से दिनेश त्रिवेदी, एनसीपी से गोविंद राव आदिक, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग से ई. अहमद, माकपा से वासुदेव आचार्य, भाकपा से गुरूदास दासगुप्ता, फार्वर्ड ब्लाके से नरहरि महतो और आरएसपी से प्रशांतों मजूमदार आदि होंगे। कश्मीर में कांग्रेस को साथ लेकर सरकार चला रही नेशनल कांफ्रेंस का प्रतिनिधित्व केंद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला करेंगे।
उल्लेखनीय है कि गत जून से भारत प्रशासित कश्मीर में आजादी की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू हुए थे। इन हिंसक प्रदर्शनों में सुरक्षा बलों की गोलीबारी से अब तक सौ से अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं और काफी लोग घायल हुए हैं। इन तीन महीनों में घाटी अमूमन बंद रही है। कभी प्रदर्शनकारियों के बंद की बजह से तो कभी कफ्र्यू की वजह से।
केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम के साथ 38 सदस्यों के इस प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य स्थिति का जायजा लेना और स्थानीय राजनीतिक दलों और अलगावादी नेताओं से बातीचत करना है, लेनिक प्रतिनिधिमंडल के वहां पहंचने से पहले ही प्रमुख अलगाववादी नेता हुर्रियत कांफ्रेंस के एक ध़ड के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने इस प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि इस प्रतिनिधिमंडल के पास भारतीय संविधान से बाहर जाकर कश्मीर समस्या हल करने के बारे में बात करने का कोई अधिकार नहीं है इसलिए वह प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलेंगे। दूसरी तरफ हुर्रियत काँफ्रेंस के एक और ध़डे के नेता मीरवाइज उमर फारूक ने कहा है कि इस प्रतिनिधिमंडल से मिलने के बारे में वह हुर्रियत काँफ्रेंस से बाहर, समान विचारधारा वाले सभी दलों से चर्चा करेंगे। इसमें यासीन मलिक के नेतृत्व वाला जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) शामिल है। उन्होंने कहा है कि अंतिम फैसला वे सोमवार को ही लेंगे। मीरवाइज ने कहा, यह विडम्बना है कि एक ओर सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से मिलने का निमंत्रण मिला है और दूसरी तरफ सरकार ने उन्हें घर में नजरबंद कर दिया है।
मुख्य विपक्षी दल पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि वह उसी सूरत में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से चर्चा करेंगी जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला कफ्र्यू हटाने की घोषणा करेंगे। उनका कहना है कि सरकार कफ्र्यू लगाकर इस प्रतिनिधिमंडल के उद्देश्यों को विफल करने में लगी हुई है। सुश्री मुफ्ती ने कहा कि मानवाधिकार कार्यकर्ता और सिविल सोसायटी के लोग प्रतिनिधिमंडल से मिलें, मगर साथ ही उन्होंने इसमें कफ्र्यू के कारण बाधा आने की संभावना जताई।

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