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देश में सर्वाधिक महंगाई : जेटली

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली ने बुधवार को कहा कि देश में दुनिया के कई देशों से अधिक महंगाई है।
जेटली ने कहा कि हमारे देश में खाद्य मूल्यवृद्घि 20 प्रतिशत को पार कर गई है। जबकि इसके विपरीत चीन में मई महीने में खाद्य मूल्य वृद्घि 6$10 प्रतिशत, रूस में 4.50 प्रतिशत, मलेशिया में 2.5 प्रतिशत, फिलीपीन्स में 3.06 प्रतिशत रही। जेटली ने राज्यसभा में कहा कि सरकार का तर्क है कि उसने न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की है। इसका खाद्य मूल्य वृद्घि पर असर प़डा है। यह कारण भ्रामक है। क्रयमूल्य में वृद्घि से खाद्य पदार्थो के मूल्यों में अस्थायी वृद्घि होती है। इससे किसानों को अधिक उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है और आगे चलकर इससे उत्पादन बढ़ता है तथा मूल्य कम हो जाते हैं।
भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में खाद्यान्नों का स़डना :
जेटली ने कहा कि एफसीआई के पास 305$17 लाख टन भंडारण क्षमता है। खाद्यान्न का ब़डा हिस्सा खुले में रखा जाता है और कुछ को प्लास्टिक शीटों से ढककर रखा जाता है। ऎसे में ब़डी मात्रा में खाद्यान्न स़ड जाते हैं। हर राज्य में खाद्यान्न स़ड रहा है।
एफसीआई ने चेताया है कि 16.80 करो़ड टन खाद्यान्न, जो हमारे कुल खाद्य भंडार का लगभग एक-तिहाई है, खुले में प़डा है। इसका एक कारण यह है कि एफसीआई और राज्य वेयरहाउस निगमों ने गोदामों को अन्य प्रयोजनों के लिए किराए पर देने में अधिक फायदा पाया है। जयपुर में एफसीआई गोदामों में शराब भरी है। हाल ही में एक न्यूज चैनल ने बताया है कि कानपुर में 11 में से 6 गोदामों को राज्य वेयर हाउस निगमों ने पेप्सी और आईटीसी को किराए पर दिया गया है, क्योंकि उनसे अधिक किराया मिलता है।
फर्म दर और फुटकर मूल्यों के बीच अंतर :
जेटली ने कहा कि फर्म मूल्यों और फुटकर मूल्यों के बीच भारी अंतर रहता है। विपणन लागत, परिवहन लागत, कर, रिटेलर्स सभी से बिचौलियों को लाभ होता है न कि किसान को। जेटली ने कहा कि कोरग्रुप की बैठक में उपभोक्ता मामलों के विभाग के प्रजेंटेशन में इंगित किया गया था कि थोक और फुटकर मूल्य के बीच में काफी अंतर था।
मुद्रास्फीति के व्यापक परिणाम : जेटली ने कहा कि मुद्रास्फीति आम आदमी पर गैरसंवैधानिक कर है। वित्त मंत्री मूल्यवृद्घि और मुद्रास्फीति के बीच अंतर करने का प्रयास कर सकते हैं। किंतु आम आदमी के लिए दोनों का एक ही अर्थ है। मुद्रास्फीति बचत का वास्तविक मूल्य कम कर देती है, क्योंकि मुद्रास्फीति से ब्याज दर कम हो जाती है। मुद्रास्फीति उपभोक्ता की व्यय शक्ति को और आर्थिक वृद्धि को चोट पहुंचाती है। मुद्रास्फीति वाली अर्थव्यवस्थाओं के उत्पाद अन्य के उत्पादों से महंगे होते हैं, जिससे वृद्घि रोजगार और भुगतान संतुलन पर बुरा प्रभाव प़डता है। मुद्रास्फीति अमीर और गरीब के बीच विषमता बढ़ाती है। अमीर इसे सह लेते हैं, पर गरीब इससे बच नहीं पाता। मुद्रास्फीति को कम करने के लिए नीतिगत उपाय सकल मांग कम करते हैं और अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाते हैं।
थोक मूल्य सूचकांक :
सरकार थोक मूल्य सूचकांक के संदर्भ में मुद्रास्फीति को मापती है, किंतु आज थोक मूल्य सूचकांक वास्तविक मूल्य वृद्घि का सही पैमाना नहीं है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक थोक मूल्य सूचकांक से काफी ऊंचा होता है। यह सही समय है कि सरकार वास्तविकता के निकट आंक़डे प्रस्तुत किए जाने पर विचार करे। सरकारी पदाधिकारियों द्वारा मुद्रास्फीति की संभावित कमी के दावों पर कोई विश्वास नहीं करता। जबकि इस वर्ष अच्छे मानसून से भरपूर फसल की संभावना है।
हमें आशंका है कि सरप्लस खाद्यान्न, भंडारण की कमी की वजह से नष्ट हो जाएगा। संसद केवल बहस का ही मंच नहीं है, इसे सरकार को कार्रवाई करने के लिए मजबूर करना चाहिए। जेटली ने आगे कहा कि भारत बंद की भारी सफलता ने जनता की भावनाओं को व्यक्त कर दिया है। हम सरकार की निंदा पर मतदान चाहते है। सरकार सहमति चाहती है किंतु सहमति तभी वास्तविक होगी, जब सरकार कार्रवाई करे।

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