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अयोध्या में यथा स्थिति बनी रहेगी : चिदम्बरम

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने शुक्रवार को कहा कि अयोध्या विवाद पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के फैसले के आधार पर 1992 में बाबरी मस्जिद को ढहाने की कार्रवाई को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।
साथ ही उन्होंने कहा कि अयोध्या के विवादित जमीन पर यथा स्थिति बनी रहेगी।
चिदम्बरम ने कहा, ""इस फैसले का 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस से कुछ लेना-देना नहीं है। लिब्रहान आयोग के मुताबिक वह पूरी तरह अस्वीकार्य था। यह फैसला किसी भी रूप में बाबरी मस्जिद के विध्वंस को न्यायोचित नहीं ठहराता। वह आज भी एक आपराधिक मामला है।"" अयोध्या मसले पर उच्चा न्यायालय का फैसला आने के एक दिन बाद चिदम्बरम ने अपने मंत्रालय का मासिक रिपोर्ट कार्ड पेश करने के दौरान यह बात कही।
उन्होंने कहा, ""जब तक सर्वोच्च न्यायालय में मामला नहीं आ जाता तब तक हमें इंतजार करना प़डेगा। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया है लेकिन अभी यह प्रभावी नहीं है।"" गुरूवार को उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने अयोध्या के विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया था। लेकिन मुकदमे के एक पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड ने फैसले को सर्वोच्चा न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है।  

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