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बैंक अपना नकद रिजर्व तिगुना करेंगे

लंदन। केंद्रीय बैंकों के गवर्नर और बैंक नीति निर्माता अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली में सुधार के लिए नए नियमों पर राजी हो गए हैं। इसके तहत बैंकों को अपने वर्तमान नकद रिजर्व को तिगुना करना होगा।
बैंकिंग प्रणाली से जु़डे अधिकारियों की स्विट्जरलैंड में हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वित्तीय संकटों के खतरे को को कम करना। बैठक में पारित नए नियमों को आठ साल के दौरान कई चरणों में लागू किया जाएगा। बैंकिंग प्रणाली की सुधार की दिशा में यह नया नियम एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। इस नियम से बैंकों की घाटने का सामना करने की क्षमता बढ़ेगी और उन्हें सरकारी पैसे की मदद नहीं लेनी होगी। ब्रिटेन के वित्तीय सेवा प्राधिकर के अध्यक्ष लॉर्ड टर्नर का कहना है कि ये नियम विश्व वित्तीय मापदंडों पर मजबूत लगाम का काम करेंगे और एक जूझारू विश्व बैंकिंग प्रणाली की दिशा में एक ब़डी भूमिका अदा करेंगे। विश्व वित्तीय संकट के बाद जी-20 देशों के नेताओं की बैठक में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में सुधार पर खासा जोर दिया गया था। ये नियम उसी प्रक्रिया के तहत लाए जा रहे हैं। हालांकि बैंक रिजर्व रकम बढ़ाने से घबराते रहे हैं, क्योंकि इससे उनके कार्यक्रमों पर रोक लगती ही है, साथ ही अधिकारियों को दिए जाने वाले बोनस पर भी अंकुश लगता है। मगर अब विश्व मंदी का संकट झेल चुके बैक भी सुधार किए जाने से सहमत हैं। नए कीनून के तहत बैंकों को अब और पूंजी की जरूरत होगी। इस नए प्रस्तावित कानून पर नवंबर में होनेवाली जी-20 देशों की बैठक के दौरान फैसला लिया जाएगा। उधर, कुछ बैंकों को डर है कि इस नए कानून से कर्ज में और कटौती हो जाएगी, क्योंकि नकद रिजर्व बढ़ाने का सबसे आसान तरीका यही हो सकता है। नीति निर्माता भी इससे सहमत हैं और उनका कहना है कि इसी वजह से इस नियम को आठ साल के दौरान कई चरणों में लागू करने की बात कही गई है, ताकि आर्थिक मंदी से उबरने की प्रक्रिया में रूकावट नहीं आए।

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