नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के नेताओं और सरकार के बीच समन्वय का अभाव है। पार्टी का कहना है कि गठबंधन के नेताओं की सरकार पर पक़ड कमजोर प़ड गई है।
मानसून सत्र के समापन के बाद बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ""ऎसा लगता है कि संप्रग का नेतृत्व सरकार पर अपनी पक़ड खो रहा है।"" सुषमा ने कहा, ""हम कई मुद्दों पर सरकार को ƒोरने में कामयाब रहे। महत्वपूर्ण बात यह है कि चाहे महंगाई का मुद्दा हो या फिर भोपाल गैस त्रासदी का मामला, हर बार सरकार अलग-थलग प़ड गई। पूरे सत्र में प्रतिपक्ष एकजुट रहा।"" उन्होंने कहा, ""कुछ मुद्दे जरूर रहे जहां हमारी राय अन्य विपक्षी दलों से अलग रही। परमाणु दायित्क विधेयक पर हमारी कुछ आपत्तियां थीं जिन्हें सुधार लिया गया। इसके बाद हमने इस विधेयक का समर्थन किया और यह पारित हो गया। जम्मू एवं कश्मीर के मसले पर हमारी राय अलग रही।"" सुषमा ने कहा कि संप्रग सरकार "फ्लोर मैनेजमेंट" में पूरी तरह विफल रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस सत्र में सरकार ने महंगाई के मुद्दे पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास किया। उधर, जेटली कहा, ""सरकार में शामिल कुछ लोगों की प्राथमिकता खाद्य सुरक्षा विधेयक, तो कुछ की परमाणु दायित्व विधेयक है। हर मंत्री अपने मंत्रालय से संबंधित विधेयक को पारित कराने के प्रयास में लगा है। वहीं मंत्रियों और सत्तारूढ़ गठबंधन के सांसदों में भी कई मामलों में एक राय नहीं दिखी।"" जेटली ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सदन के भीतर काफी सक्रिय रहा और उनकी पार्टी संसद के बाहर भी इस सक्रियता को कायम रखेगी। उन्होंने कहा कि सरकार सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम, (एएफएसपीए) में बदलाव करना चाहती है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्षा ने कहा कि उक्त कानून में जल्दबाजी में कोई बदलाव करने के खिलाफ सरकार को आगाह करते हुए कहा कि ऎसा करने से सुरक्षा बल प्रभावित होंगे। उल्लेखनीय है कि संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही मंगलवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। मानसून सत्र की शुरूआत 26 जुलाई को हुई थी।





















