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भारत समाचार

डेंगू का खात्मा करेंगे जीएम मच्छर !

नई दिल्ली। मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों पर रोकथाम के लिए अब वैज्ञानिक आनुवांशिक रूप से संवर्द्धित (जीएम) मच्छरों का इस्तेमाल करने की सोच रहे हैं।
इनके इस्तेमाल से अप्रत्याशित समस्याएं उत्पन्न होने की भी आशंका बनी हुई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आनुवांशिक रूप से संवर्द्धित मच्छर परिवेश में मौजूद मादा मच्छरों से प्रजनन करेंगे। इनसे उत्पन्न मच्छरों की जीवन अवधि कम होने से उनकी जनसंख्या पर रोक लगेगी। मलेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी लिम चुआ लेंग ने बताया कि उनका देश जीएम मच्छरों का इस्तेमाल करने वाला एशिया का पहला देश हो सकता है। यहां करीब 3,000 जीएम मच्छरों को छो़डे जाने की योजना है। मलेशिया के पर्यावरण, प्रौद्योगिकी और विकास केंद्र के प्रमुख गुरमीत सिंह ने बताया, ""जीएम मच्छरों से बीमारियों को रोकने की प्रक्रिया में ढेर सारे खतरे हैं। इन्हें एक बार छो़डने के बाद इन पर नियंत्रण नहीं रह जाएगा। ये समस्याएं खत्म करने के बजाय ख़डी कर सकते हैं।"" उधर, "प्रोसिडिंग ऑफ द नेशनल अकेडमी ऑफ साइंसेज" पत्रिका के मुताबिक अमेरिका स्थित जॉन्स हॉपकिंस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के शोध से पता चला है कि जीएम मच्छर जंगली परिवेश में जीवित रहने में सक्षम हैं। इसी बीच ब्रिटेन स्थित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की जैव प्रौद्योगिकी की शाखा "ओक्सीटेक" के शोधकर्ता एडिज एजिप्टी मच्छरों की जनसंख्या पर विराम लगाने के लिए जीएम मच्छरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। विदेशी वैज्ञानिकों के इस शोध पर दिल्ली के एस्कार्ट ह्वदय संस्थान और अपोलो अस्पताल के पूर्व ह्वदय विशेषज्ञ पार्थसारथी बोस, जो अब कोलकाता में परामर्शदाता हैं, ने सावधान करते हुए कहा, ""इससे मलेरिया परजीवी और डेंगू वायरस के प्रजातियों के विकसित होने की आशंका है।""  

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