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नहीं होने चाहिए थे राष्ट्रमंडल खेल: अय्यर

नई दिल्ली। हाल ही संपन्न राष्ट्रमंडल खेलों के मुखर आलोचक तथा कांग्रेस सांसद एवं पूर्व खेल मंत्री मणि शंकर अय्यर का अब भी यही कहना है कि भारत में इन खेलों का आयोजन नहीं होना चाहिए था। "सीएनएन-आईबीएन" चैनल को दिए साक्षात्कार में अय्यर ने वैसे यह स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रमंडल खेलों की उनकी आलोचना का भारतीय खिलाç़डयों से कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने कहा, ""मेरी आलोचना का सम्बंध बुनियादी नैतिक मूल्यों और राष्ट्र के गौरव से था। मैंने तब भी सवाल उठाया था और मैं अब भी पूछता हूं कि यदि महात्मा गांधी जीवित होते, तो क्या वे इस खेल आयोजन के उद्घाटन के लिए दीप प्र”ावलित करने को राजी होते। इसका उत्तर है नहीं!""

उन्होंने कहा, ""हम ऎसे मुल्क में रहते हैं कि जहां के 47 प्रतिशत बच्चो कुपोषण का शिकार हैं, क्योंकि 10 में से नौ गर्भवती महिलाएं रक्ताल्पता से पीç़डत हैं। हम सबसे ज्यादा शिशु मृत्यु दर वाले देशों में से हैं। इन खेलों में खर्च वार्षिक ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के खर्च के वार्षिक बजट से चार गुणा ऊपर चला गया। क्या हमें अपने संसाधन इस तरह इस्तेमाल करने चाहिएक् दूसरा, यदि हमारे पास ऎसे संसाधन हैं तो हम उन्हें लगाकर अपने बच्चों को खेल सुविधाएं क्यों नहीं उपलब्ध करा रहे हैं। 95 प्रतिशत भारतीय बच्चाों को किसी तरह का खेल प्रशिक्षण नहीं मिल पाता। देश को खिलाç़डयों का देश बनाने की जगह हम उसे खेल आयोजकों का देश बना रहे हैं। उन्होंने कहा, ""मेरा विरोध कभी भी भारतीय खिलाç़डयों के प्रति नहीं रहा....इस खेल में उन्होंने पदक इसलिए नहीं जीते कि घरेलू टीम होने के नाते उन्हें किसी किस्म की विशेष सुविधाएं मुहैया कराई गई थीं।"" अय्यन ने कहा, ""हमारे खेल अधिकारियों और आयोजन समिति से सम्बद्ध अन्य अधिकारियों की अकर्मण्यता के बावजूद ....वे जीते।"" अय्यर ने कहा कि वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का केंद्र बनी खेलों की बेकार तैयारियों के सम्बंध में किसी एक व्यक्ति विशेष की आलोचना नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने वायदा किया था कि हर बात, हर चूक की मुकम्मल जांच होगी और दोषी को दंडित किया जाएगा। उन्होंने कहा, ""अब ख्ेाल सम्पन्न हो चुके हैं और ...वह जांच अब शुरू हो जानी चाहिए।""  

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