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भारत समाचार

दिल्ली में 12वीं की छात्रा करती थी अवैध हथियार सप्ला्ई

नई दिल्ली। दिल्ली के एनसीआर में बदमाशों को अच्छी क्वालिटी के अवैध सेमी ऑटोमैटिक हथियार सप्लाई करने वाले सिंडिकेट के दो सदस्यों को स्पेशल सेल ने गिरफ्तार कर लिया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से एक स्कूली छात्रा है। इनके पास से पुलिस .32 बोर की चार सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल भी बरामद की है। आरोपियों की पहचान मुस्तफाबाद निवासी जैनब निशा (20) और फिरोजाबाद (यूपी) के रहने वाले रियाज मोहम्मद उर्फ पप्पू (44) के रूप में हुई है। एडीशनल डीसीपी (स्पेशल सेल) शिवेश सिह के मुताबिक इस गिरोह के बारे में पुलिस को लगातार सूचनाएं मिल रही थीं।
मंगलवार को पता चला कि गिरोह के सदस्य शाम को बृजपुरी इलाके में एक रेस्तरां के पास हथियारों की खेप सप्लाई करने के लिए आने वाले हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने रेस्तरां के पास ट्रैप लगा दिया और थो़डी देर बाद वहां पहुंचे इन दोनों आरोपियों को दबोच लिया। जब ल़डकी के पास मौजूद बैग की तलाशी ली गई, तो उसमें से कार्ड बोर्ड के दो बक्सों में बंद चार पिस्टलें बरामद हुईं। इनसे पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक सबसे ब़डा खुलासा तो यह हुआ कि यह गिरोह हथियारों की सप्लाई के लिए युवतियों का इस्तेमाल करता था, क्योंकि उन पर पुलिस भी ज्यादा शक नहीं करती थी। बिहार से लाए जाने वाले इन हथियारों की सप्लाई के अलग-अलग ट्रांजिट पाइंट थे और हर पाइंट पर एक कॉओर्डिनेटर रहता था, जो इन हथियारों को रिसीव या डिलीवरी करता था।
युवतियां अपने लगेज में इन हथियारों को इस तरह छिपाकर लाती थीं कि उनके लगेज की एक्स-रे मशीन से भी हो, तो भी किसी को कुछ पता न चले। युवतियों का बाकयदा ट्रेन के एसी कोच में रिचर्वेशन कराया जाता था। ज्यादातर पटना से इन हथियारों को युवतियों के हवाले किया जाता था और आगरा में उन्हें रिसीव कर लिया जाता था। वहां से बस या प्राइवेट ग़ाडी के जरिए हथियारों को दिल्ली एनसीआर मे लाया और बेचा जाता था। पुलिस का कहना है कि ओपन स्कूल से 12वीं की पढ़ाई कर रही जैनब के पिता यमुनापार के एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। जैनब फैक्ट्री में काम करती थी। वहां पप्पू का एक रिश्तेदार काम करता था। पप्पू अक्सर उससे मिलने आता था।
वहीं पर जैनब और पप्पू की मुलाकात हुई। जब जैनब को पप्पू के असली काम के बारे में पता चला, तो उसने पप्पू से कहा कि वह आसानी से हथियारों को बिकवा सकती है। पप्पू ने उसे भी गिरोह में शामिल कर लिया। हर हथियार की सप्लाई पर जैनब को 12 हजार रूपए मिलते थे। फिरोजाबाद में पप्पू का साला शमीम उसे हथियार उपलब्ध कराता था। जब कोई कस्टमर मिल जाता ता तो जैनब पप्पू से संपर्क करती थी। उसके बाद ही हथियार दिल्ली लाए जाते थे। यह लोग 25 से 30 से हजार में ये हथियार बेचते थे।
पुलिस को इस गिरोह में शामिल दिल्ली की एक अन्य ल़डकी के बारे में भी पता चला है। पुलिस अब उसे व इस गिरोह के अन्य सदस्यों को तलाश रही है।

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