लखनऊ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में रामगंगा, कोसी, मालन और गंगा नदियों की तबाही जारी है। 500 से ज्यादा गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है और चार लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के कारण प्रदेश से गुजरने वाले तीन राष्ट्रीय राजमार्गो पर यातायात बुरी तरह से प्रभावित हुआ। सहारनपुर में दिल्ली-अंबाला राष्ट्रीय राजमार्ग-73 और मुरादाबाद में दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार को तीन दिन बाद यातायात फिर से शुरू हो गया, वहीं बिजनौर में दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग-74 अब भी बंद है।
प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बरसात और उत्तराखण्ड के कालागढ़, नंद सागर, भमगो़डा बांध से लाखों क्यूसेक पानी छो़डे जाने से बिजनौर, मुरादाबाद, अमरोहा, शाहजहांपुर, बरेली, रामपुर, बुलंदशहर, सहारनपुर और फर्रूखाबाद जिलों में रामगंगा, मालन, कोसी और गंगा नदी उफान पर हैं, जिससे इन जिलों के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। प्रभावित जिलों में राहत व बचाव दल द्वारा बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है। कई स्थानों पर प्रशासन के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। मुरादाबाद के अपर जिलाधिकारी (वित्त) के.के. सिंह ने बुधवार को आईएएनएस को बताया कि जिले के 200 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ से जिले में सात लोगों की मौतें हुई हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार सुबह रामगंगा और कोसी के जलस्तर में कुछ कमी आई है। एटा, बिजनौर, बुलंदशहर, मेरठ सहित कुछ जिलों में गंगा भी उफान पर बह रही है। बिजनौर के अपर जिलाधिकारी (वित्त) रेवाराम सिंह ने आईएएनएस को बताया चांदपुर तहसील में गंगा का पानी उफान पर आने से करीब 40 गांव प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि जिले में दो लोगों की बाढ़ से मौत हुई है। उधर उत्तराखण्ड स्थित बनबसा बैराज से एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छो़डे जाने के कारण घाघरा और शारदा का जलस्तर 20 सेंटीमीटर बढ़ गया है। बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, सीतापुर, लखीमपुर खीरी व बस्ती जिले तो पहले से ही घाघरा और शारदा का कहर झेल रहे हैं। यहां बाढ़ से करीब 400 से ज्यादा गांवों की तीन लाख से ज्यादा की आबादी प्रभावित हुई है। अधिकारियों ने इन जिलों में बाढ़ से 20 लोगों की मौत होने की पुष्टि की है।
भारत समाचार
पश्चिमी उप्र में बाढ़ का कहर, 4 लाख प्रभावित





















