शिमला। यूं तो सेब की फसलों को कीटों से बचाने में चमगाद़ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है, लेकिन इस बार सेब उत्पादन के गढ़ माने जाने वाले शिमला के ऊपरी क्षेत्रों में चमगाद़डों ने सेब की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
चमगाद़ड अधिकांश फलों पर चिपकने के दौरान अपने पंजों के निशान छो़ड देते हैं, जिसके कारण वे खाने योग्य नहीं रह जाते हैं। शिमला के ऊपरी इलाके के भमनोली गांव के सेब उत्पादक रोशन लाल मानता ने बताया कि चमगाद़ड सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने बताया,""चमगाद़डों ने कई इलाकों में सेब की फसलों को 50 फीसदी तक नुकसान पहुंचाया है।"" मानता ने बताया,""हम चमगाद़डों की इस समस्या से 40 साल के लंबे अंतराल के बाद फिर दो-चार हो रहे हैं। "" एक अन्य सेब उत्पादक रणविजय सिंह ने बताया कि चमगाद़डों ने ब़डे पैमाने पर सेब की फसलों को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने बताया,""सेब तैयार होने के बाद हाल के हफ्तों में चमगाद़डों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। मुझे लगता है भारी बारिश की वजह से चमगाद़ड इससे पहले भोजन की तलाश में कहीं दूसरे जगह पलायन कर गए थे और बारिश खत्म होने के बाद फिर वापस लौट आए हैं।""
सोलन के ऊपरी क्षेत्रों में प्राणियों पर शोध कर रही उत्तम सैकिया ने बताया,""इस क्षेत्र में चमगाद़ड की दो तरह की प्रजातियां पाई जाती है। एक फ्लाईग फॉक्स और दूसरा फुलवौस फू्रट वैट।"" उन्होंने बताया,""फ्लाईग फॉक्स चमगाद़ड की आम प्रजाति है। यह प्रदेश के रोहर शहर के आस-पास के क्षेत्र में सक्रिय है।"" सैकिया के मुताबिक फ्लाईग फॉक्स ने हालांकि कुछ सेब की फसलों को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन पर्यावरण को साफ रखने में यह अहम भूमिका निभाता है। नुकसान के मुकाबले इसके फायदे कहीं अधिक है। उन्होंने बताया कि चमगाद़ड कीटों को नियंत्रण करने में अहम भूमिका निभाते हैं। किसान फलों की रक्षा के लिए कई अन्य तरकीबें अपना कर उसे बचा सकते हैं।
भारत समाचार
हिमाचल में सेब की फसलों को चमगाद़डों से नुकसान





















