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भारत समाचार

नक्सलियों ने कहा, सशर्त वार्ता को तैयार

हैदराबाद। नक्सलवादी संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) कहा है कि हालांकि सरकार और माओवादियों के बीच बातचीत के लिए अनुकूल वातावरण नहीं है, फिर भी वे कुछ शर्तो पर सरकार से बातचीत के लिए तैयार है।
पार्टी के प्रमुख नेता लक्ष्मण राव उर्फ गणपति ने अपनी लंबी खामोशी तो़डते हुए कहा कि केंद्र सरकार और माओवादियों के बीच बातचीत के लिए वातावरण अनुकूल नहीं है, लेकिन वे कुछ शर्तो पर सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने बातचीत से पहले सीपीआई (माओवादी) पर से प्रतिबंध हटाने और उसे किसी भी दूसरे दल की तरह काम करने का लोकतांत्रिक अधिकार देने, ऑपरेशन ग्रीन हंट रोकने, अर्धसैनिक बलों को वापस बुलाना और जेल में बंद माओवादी नेताओं की रिहाई की शर्त रखी है।
उन्होंने कहा कि अतीत को देखते हुए किसी भी भूमिगत नेता के लिए सीधे बातचीत करना संभव नहीं है इसलिए सरकार जेलों में बंद माओवादी नेताओं को रिहा करे ताकि वे वार्ता में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर सकें।
अनेक पत्रकारों के सवालों के जवाब में भेजे गए इस लंबे वक्तव्य में गणपति ने कई विषयों पर अपनी राय रखी है। उन्होंने अपनी पार्टी के एक मुख्य नेता आजाद की आंध्र प्रदेश में पुलिस के हाथों मुत्यु से लेकर, कश्मीर, अयोध्या, पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव और हथियारों की तस्करी जैसे कई विषयों पर अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने यह आरोप दोहराया कि सरकार कभी भी माओवादियों के साथ बातचीत के विषय में गंभीर और ईमानदार नहीं रही है।
उन्होंने कहा कि आजाद ने आखिरी समय तक यही कहा कि माओवादी युद्ध-विराम के लिए तैयार हैं, बशर्ते सरकार भी ऎसा ही करे। लेकिन केंद्र सरकार ने उल्टा एक साजिश के तहत आजाद को मार डाला। गणपति ने माना कि आजाद की मौत संगठन के लिए बहुत ब़डा धक्का है।
दरअसल गणपति एक गुप्त स्थान पर पत्रकारों से मिलने वाले थे, लेकिन आजाद की मौत के बाद माओवादी नेताओं की सुरक्षा के लिए बढ़ते खतरे के मद्देनजर इस कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया। कश्मीर पर उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी आजादी और स्वाधीनता के लिए कश्मीरी जनता की जायज ल़डाई का पूरा समर्थन करती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस वक्तव्य पर कि माओवादियों को बांग्लादेश, चीन और म्यांमार से हथियार मिल रहे हैं, गणपति ने कहा कि यह सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से माओवादियों को आतंकवादी और गद्दार बनाकर पेश करने की कोशिश है। उनके लिए हथियारों का असल स्त्रोत सरकारी सुरक्षाबलों के पास से छीने गए हथियार होते हैं। गणपति ने माना कि उनका संगठन देश और विदेश के बाजारों से भी हथियार खरीदेगा जैसा कि भारत सरकार अनेक देशों से युद्ध सामग्री और टेक्नोलॉजी खरीद रही है। तृणमूल से दोस्ती नहीं पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव के बारे में उन्होंने कहा कि वहां की जनता ने माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को सबक सिखाने का फैसला कर लिया है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने से सब कुछ बदल जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ नहीं बदलेगा, क्योंकि वह न तो जमींदारों की जमीन छीनकर गरीब किसानों को देगी और न ही राज्य में स्वतंत्र चुनाव होंगे। अयोध्या पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय की क़डी आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह फैसला मुसलमान समुदाय के साथ नाइंसाफी है। इस फैसले को एक उदाहरण बनाकर मस्जिद को एक विवादित स्थान बनाया जा सकता है और हर अल्पसंख्यक के धार्मिक स्थान को गिराया जा सकता है।

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