अयोध्या। फूलों से जेहन में खुशबू का अहसास होता है, लेकिन अयोध्या में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग इन्हीं फूलों के जरिए कौमी एकता का एक खूबसूरत पैगाम भी दे रहे हैं। इनके द्वारा बनाई गई फूल की मालाएं श्रद्धालु यहां के मंदिरों में पूरे भक्ति भाव से अर्पित करते हैं।
अयोध्या के अशर्फी भवन के पास रहने वाले करीब 15 मुस्लिम परिवार दशकों से हिंदू श्रद्धालुओं के लिए फूलों के हार-मालाएं व अन्य सजावटी सामान बनाने का काम कर रहे हैं। 40 वर्षीय अशरफ अली ने आईएएनएस से कहा, ""मंदिरों के लिए फूल-मालाएं बनाने का काम हमारे यहां पीढि़यों से चला आ रहा है।
हिंदू-देवी देवताओं के लिए मुसलमानों का फूलों की मालाएं बनाना बाहर के लोगों के लिए अनोखी बात होगी, लेकिन अयोध्या के लोगों के लिए यह सामान्य बात है।""
उन्होंने कहा, ""हिंदू श्रद्धालु या तो हम से सीधे संपर्क करके फूलों के हार व अन्य सजावटी सामान खरीद लेते हैं या वे मंदिरों के बाहर लगने वाले फूलों की दुकानों से खरीददारी करते हैं। इन दुकानों पर हम लोग फूलों की आपूर्ति करते हैं। धार्मिक त्योहारों के दौरान जब ब़डी मात्रा में फूल-मालाओं की आवश्यकता होती है तो उस समय विभिन्न मंदिरों के पुजारी भी हमसे संपर्क करके आर्डर देते हैं।"" कई मुस्लिम परिवारों के खुद के फूलों के बागीचे हैं तो कुछ मालाएं बनाने के लिए बाहर से भी फूल खरीदकर लाते हैं। ज्यादा मुनाफा वाला व्यवसाय न होने के बावजूद ये लोग इससे लगातार जु़डे हुए हैं। उनका मानना है कि हिंदू श्रद्धालुओं के लिए मालाएं बनाना अब उनके लिए एक व्यवसाय से ज्यादा जिम्मेदारी बन गई है यहां के निवासी सलीम के मुताबिक वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि ईश्वर ने उन्हें श्रद्धालुओं की मदद करने वाला काम सौंपा है। फूल की मालाएं बनाने वाले मुस्लिम परिवार प्रतिदिन 200 से 250 रूपये कमाते हैं, लेकिन उत्सव के दौरान उनकी कमाई बढ़ जाती है। फूल व्यवसायी महताब ने बताया कि वह धार्मिक त्योहारों और उत्सवों के दौरान आम दिनों के मुकाबले दो से तीन गुना कमाई कर लेते हैं। अयोध्या मामले पर मालिकाना हक को लेकर आने वाले अदालत के फैसले के बारे में पूछने पर वह कहते हैं कि फैसले से उन्हें कोई फर्क नहीं प़डेगा।
भारत समाचार
फूलों के जरिए कौमी एकता का पैगाम





















