मुंबई। बेरोजगारी से जूझ रहे अमेरिकी राज्य ओहायो ने सरकार के आईटी और बैक ऑफिस प्रॉजेक्ट की आउटसोसिंग पर बैन लगा दिया है। इससे यह डर पैदा हो गया है कि बढती बेरोजगारी से परेशान दूसरे अमेरिकी स्टेट भी ऎसा ही कदम न उठाने लगे। ओहायो के गवर्नर टेड स्ट्राइकलैड ने पिछले महीने जारी एक्जेक्यूटिव ऑर्डर में कहा कि ऑफशोर प्रोवाइडर के साथ बडे पैनाने पर सर्विस डिलीवरी संबंधी समस्याएं पेश आ रही है। एक तो इनकी सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहा है और दूसरी बात यह कि ये सेवाएं ऑफशोर मुहैया कराई जा रही है। वीजा फी बढाए जाने के बाद यह भारती आईटी उद्योग के लिए एक और झटका है। भारत में ऑफशोरिंग के जरिए आने वाला कामकाज 50 अरब डॉलर का उद्योग है। भारत के टेक्नॉजली उद्योग का उन अमेरिकी कंपनियों से काफी फायदा हुआ है जो कम भत्तो और बढिया गुणवत्ता वाले कौशल का फायदा लेना चाहती है।
इस उद्योग में देश भर के करीब 30 लाख लोग काम कर रहे है। हालांकि भारतीय कंपनियां अपने कारोबार के बडे हिस्से के लिए निजी कंपनियां पर निर्भर करती है। उन्हें सरकार से कम ही ऑर्डर मिलते है। टीसीएस ओहायो में काम करने वाली अकेली भारतीय कंपनी है। इसमें 300 लोग काम करते है और कंपनी स्थानीय रोजगार पैदा करने के लिए टैक्स क्रेडिट के रूप में 1.9 करोड डॉलर हासिल करती है। मगर इस तरह के फैसले भारतीय कंपनियों के खिलाफ माहौल बना रहे है। इससे भारतीय कंपनियों के काम में बाधा आती है। वर्जीनिया जैसे राज्यों में आउटसोर्सिग का विरोध तेज होता जा रहा है। पिछले प्ताह वेस्ट वर्जीनिया पब्लिक वर्कर्स युनियन ने ऑफिस ऑफ टेक्नॉलजी की ओर से आईटी रोजगारों की प्रस्तावित आउटसोर्सिग के खिलाफ मुकदमा दाखिल किया है।
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अमेरिका : ओहायो राज्य में किया आउटसोसिंग को बैन





















