पटना। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने मुद्रास्फीति की वर्तमान स्थिति को चिंताजनक बताते हुए आशा जताई है कि खाद्य वस्तुओं के दाम जुलाई तक नीचे आ जाएंगे।
वित्तमंत्री का कहना था कि आयात संबंधी किए गए उपाय और मानसून के जुलाई में अच्छे रहने के अनुमान से यह लगता है कि मध्य जुलाई तक खाद्य वस्तुओं के दाम घटेंगे। खाद्य वस्तुओं के आयात शुल्क में कमी या छूट का ज्यादा असर न दिखने के बारे में वित्तमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी हुई कीमतें इसका मुख्य कारण हैं।
पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए जाने के सरकारी संकेत के बारे में प्रणव मुखर्जी ने सिर्फ इतना कहा कि अभी ऎसी कोई बात नही है। प्रणव मुखर्जी ने यह बातें सोमवार को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। उनकी पहल पर पटना में पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के चार मुख्यमंत्री समेत दस राज्यों के वित्त मंत्रियों और बैंक प्रबंधकों की बैठक आयोजित हुई थी। इस बैठक का मकसद सरकारी योजनाओं और बैंकों के बीच हो रही समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना था। बैठक में दस राज्यों के प्रतिनिधि और बिहार, असम, नगालैंड और मेघालय के मुख्यमंत्रियों ने भाग लिया। बैठक के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री ने बताया कि इन राज्यों में सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों से जु़डी समस्याएं पर बार-बार उठती रहती हैं इसलिए उन्हीं समस्याओं पर खास तौर से विचार हुआ है। बैठक में साख-जमा अनुपात पर कई राज्यों के प्रतिनिधियों ने बैंकों के रवैए को भेदभावपूर्ण बताया। उनका कहना था कि कुछ पिछ़डे राज्यों से जितने रूपए वहां के बैंकों में जमा किए जाते हैं उसकी तुलना में बहुत कम रूपए उस राज्य में बैंकें बतौर ऋण देते हैं। बिहार का प्रतिनिधि का कहना था कि उसे जमा रकम का सिर्फ तीस प्रतिशत कर्ज दिया जाता है जबकि राष्ट्रीय औसत 72 प्रतिशत है। इसी तरह जरूरत के मुताबिक बैंकों की शाखाएं यहीं नहीं खोली गई हैं।
भारत समाचार
प्रणव को आस, जुलाई तक नीचे आ जाएंगे दाम





















