टोरंटो। ब्लैकबेरी की निर्माता रिसर्च इन मोशन (आरआईएम) ने सोमवार को इस बात की पुष्टि करने से इंकार कर दिया कि एक सितम्बर से अपनी मैसेंजर सेवा तक सुरक्षा एजेंसियों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए उसने भारत सरकार से समझौता किया है या नहीं।
टोरंटो के समीप वाटरलू स्थित आरआईएम के मुख्यालय में एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा, ""इस बारे में कोई भी खबर आरआईएम से नहीं जारी हुई है।"" यह पूछे जाने पर कि क्या कंपनी के प्रतिनिधियों और भारत सरकार के बीच संभवत: समझौता तय हो चुका है, उन्होंने कहा, ""यह हमारी जानकारी में नहीं है।"" यह पूछे जाने पर कि क्या समस्या को दूर करने के लिए वार्ता जारी है, अधिकारी ने कहा, ""हम इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते।""
उन्होंने भारत द्वारा समझौते की पुष्टि किए जाने संबंधी खबरों की जानकारी होने से भी इंकार कर दिया। सोमवार को एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी के हवाले से कहा गया था कि आरआईएम ने एक सितम्बर से ब्लैकबेरी मैसेंजर सेवा तक "मैनुअल" पहुंच उपलब्ध कराने पर सहमति दी है। इस सुविधा को नवम्बर तक स्वचालित बनाया जाएगा। खबरों के अनुसार आरंभ में आरआईएम सुरक्षा एजेंसियों के आग्रह पर आंक़डे उपलब्ध कराएगी। बाद में सुरक्षा एजेंसियों की पहुंच सीधे आंक़डों तक हो जाएगी। भारत ने ब्लैकबेरी मैसेंजर और ब्लैकबेरी कार्पोरेट ईमेल सर्विस तक सुरक्षा एजेंसियों की पहुंच उपलब्ध कराने के लिए 31 अगस्त की सीमा रेखा तय की है।
भारत में ब्लैकबेरी के करीब 11 लाख ग्राहक हैं और दुनिया भर में उसके उपभोक्ताओं का दो प्रतिशत है। पिछले सप्ताह उठे विवाद के कारण आरआईएम के शेयर मूल्य में सोमवार को चार प्रतिशत से अधिक की गिरावट हुई। टोरंटो स्टॉक एक्सचेंज में आरआईएम के शेयर सोमवार को 4.62 प्रतिशत गिरकर 53.02 डॉलर पर बंद हुए।
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आरआईएम का भारत से समझौते से इंकार





















