मुम्बई। मानसिक या शारीरिक विसंगतियों पर फिल्में बनाते रहे बॉलीवुड के प्रख्यात निर्देशक संजय लीला भंसाली कहते हैं कि किसी न किसी को मानवीय पी़डाओं पर फिल्में बनानी चाहिए। उनकी नई फिल्म "गुजारिश" इच्छामृत्यु के मुद्दे को उठाती है।
भंसाली ने एक साक्षात्कार में कहा कि क्या ऎसा भी कोई है जिसे कोई दुख नहीं है या जो किसी भी बात से व्यथित नहीं होता। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि मानवीय पी़डाओं पर ध्यान देने और उन पर आधारित फिल्में बनाने की आवश्यकता है। उनकी फिल्म "गुजारिश" एक ऎसे व्यक्ति की कहानी पेश करती है जिसके शरीर का निचला हिस्सा लकवाग्रस्त है और वह इच्छामृत्यु चाहता है, जिसकी कानूनन इजाजत नहीं है।
फिल्म में अभिनेता ऋतिक रोशन ने मरीज की भूमिका निभाई है तो ऎश्वर्या राय उनकी नर्स बनी हैं। भंसाली ने कहा, ""यह बहुत अनूठा विषय है। इसे बहुत संवेदनशीलता के साथ पेश किया गया है, खासकर कलाकारों ने उनके अभिनय में यह संवेदनशीलता दिखाई है। हमने इस बात का ध्यान रखा कि इसे सही ढंग से पेश किया जाए क्योंकि यह बहुत महत्वपूर्ण चर्चा है।"" उन्होंने कहा कि इस चर्चा का जवाब बहुत जल्दी नहीं मिल सकता, इसमें कुछ और समय लगेगा लेकिन हमें विषय को ध्यान में रखकर यह समझना चाहिए कि पी़डा भोग रहे कुछ लोग इच्छामृत्यु क्यों चाहते हैं।
भंसाली ने कहा, ""भारतीय सिनेमा में इस विषय पर अब से पहले कोई फिल्म नहीं बनी है। यकीनन इस फिल्म में बहुत सा मनोरंजन भी है जो इसके विषय को बोझिल नहीं बनने देता। मैं कह सकता हूं कि जिस तरह से "आनंद" फिल्म को पेश किया गया उसी तरह इसे भी प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है।"" "आनंद" ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म है, जिसमें राजेश खन्ना ने एक कैंसर पीç़डत मरीज की भूमिका निभाई है।
फिल्म में अमिताभ बच्चन ने भी महत्पूर्ण अभिनय किया है। भंसाली ने इससे पहले "खामोशी: द म्यूजिकल", "हम दिल दे चुके सनम", "ब्लैक" और "सांवरिया" जैसी फिल्में बनाई हैं।
भारत समाचार
मानवीय पीडा पर ध्यान देना जरूरी : भंसाली





















