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भारत समाचार

टाटा के निरूद्देश्य चित्रों से हुआ था नैनो का जन्म

नई दिल्ली। मात्र एक लाख रूपये की कार का जन्म दरअसल रतन टाटा के निरूद्देश्य लेकिन रोचक चित्रों से हुआ था। नैनो के विकास क्रम पर लिखी गई किताब के मुताबिक निदेशक मंडल की बैठकों के दौरान टाटा अक्सर अपनी कलम से निरूद्देश्य ही चित्र बनाने लगते थे। इन्हीं चित्रों में उनके द्वारा बनाया गया स्कूटर को कार में बदलते हुए दिखाए जाने वाला एक चित्र भी शामिल था। इसी चित्र (डूडल) से हुआ नैनो का जन्म। किताब "स्मॉल वंडर: द मेकिंग ऑफ नैनो" के मुताबिक कर्मचारियों की एक बैठक में टाटा ने बताया था, ""इसकी शुरूआत निदेशक मंडल की नीरस बैठकों के दौरान निरूद्देश्य चित्र बनाने में गुजरने वाले मेरे समय के दौरान हुई।
हममें से ज्यादातर लोग अपने आसपास के माहौल से प्रभावित हैं और अब हम अपनी ब़डी जिम्मेदारियों को समझ पाने से वंचित हो गए हैं। हम पर अपने समाज को सेवाएं देने की जिम्मेदारी है। हम जिस समाज में रहते है उसके लोगों का जीवन स्तर सुधारना हमारी जिम्मेदारी है।"" फिलिप चाको और सुजाता अग्रवाल के साथ किताब की सह लेखिका क्रिस्टाबेला नोरोन्हा ने कहा, ""नैनो रतन टाटा की कल्पनाशीलता का परिणाम है और उनकी इस सोच का परिणाम है कि कार जैसे महंगे वाहन को भारतीय निमA मध्य वर्ग के लिए यातायात का सुलभ साधन बनाया जाए।"" नोरोन्हा ने कहा, ""इस कार के विकास की योजना लीक से हटकर और असाधारण थी।
भारत को नैनो की जितनी जरूरत है उससे कहीं ज्यादा भारत इस कार को उत्पादित करने का श्रेय हासिल करने का हकदार है।"" उन्होंने कहा, ""नैनो ने ऑटोमोबाइल्स उद्योग के नियम बदल दिए और व्यापार के एक रास्ते के बजाए कई रास्ते खोल दिए। इस उत्पाद ने साबित किया है कि भारत वास्तविक रूप से मौलिक उत्पाद प्रस्तुत करने में पूरी तरह सक्षम है।""  

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